भूमि विवादों के संबंध में राजस्व न्यायिक सेवा शुरू करने की याचिका पर केंद्र से जवाब तलब

भूमि विवादों के संबंध में राजस्व न्यायिक सेवा शुरू करने की याचिका पर केंद्र से जवाब तलब

भूमि विवादों के संबंध में राजस्व न्यायिक सेवा शुरू करने की याचिका पर केंद्र से जवाब तलब
Modified Date: April 30, 2026 / 12:54 pm IST
Published Date: April 30, 2026 12:54 pm IST

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भूमि विवादों के संबंध में राजस्व न्यायिक सेवा शुरू करने से संबंधित एक जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा।

याचिका में, भूमि विवादों में निर्णय लेने के लिए सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम कानूनी योग्यता और प्रशिक्षण मॉड्यूल संबंधी निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर भारत सरकार, विधि आयोग और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया। याचिका में कहा गया है कि अपात्र कानूनी पेशेवर भूमि विवादों का निपटारा कर रहे हैं।

याचिका में कहा गया कि लगभग 66 प्रतिशत दीवानी मामले भूमि विवादों से संबंधित होते हैं, और प्रमुख कमी यह है कि इन्हें ऐसे अधिकारी सुलझाते हैं जिनके पास औपचारिक कानूनी शिक्षा और प्रशिक्षण नहीं है, जिसकी वजह से गलत और असंगत निर्णय ले लिए जाते हैं।

अधिवक्ता अश्विनी दुबे द्वारा तैयार की गई याचिका में कहा गया कि इस मुद्दे पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया था, लेकिन उसका पालन आज तक पूरी तरह से नहीं किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि वर्तमान प्रणाली से नागरिकों को व्यापक और लगातार नुकसान हो रहा है क्योंकि भूमि विवादों का निपटारा ऐसे राजस्व अधिकारी कर रहे हैं जिनकी कानूनी पृष्ठभूमि नहीं है।

भाषा जोहेब अविनाश

अविनाश


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