मिजोरम में मृदा क्षरण रोकने के लिए केंद्र का कार्यक्रम शुरू

मिजोरम में मृदा क्षरण रोकने के लिए केंद्र का कार्यक्रम शुरू

मिजोरम में मृदा क्षरण रोकने के लिए केंद्र का कार्यक्रम शुरू
Modified Date: June 2, 2026 / 05:20 pm IST
Published Date: June 2, 2026 5:20 pm IST

आइजोल, दो जून (भाषा) मिजोरम सरकार ने मिट्टी के क्षरण को रोकने, भूमि परीक्षण आधारित उर्वरक प्रयोग को बढ़ावा देने और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए केंद्र की पहल शुरू की है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने सोमवार को लोक भवन में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कार्यक्रम ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरूआत की।

अधिकारियों ने बताया कि एक महीने तक चलने वाले इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के अधिकारी और राज्य प्रतिनिधि खेतों में विशेष रूप से यूरिया के अत्यधिक उपयोग सहित रासायनिक उर्वरकों को कम करने के लिए किसानों को संगोष्ठी और प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षित करेंगे।

इस अवसर पर सिंह ने अपने संबोधन में अधिक फसल पैदावार के उद्देश्य से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन प्रथाओं से कृषि भूमि और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

सिंह ने केंद्र सरकार के ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ का जिक्र करते हुए कहा कि पर्यावरण और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता की सुरक्षा के लिए धीरे-धीरे प्राकृतिक कृषि पद्धतियों की ओर बढ़ना आवश्यक है।

उन्होंने यह भी बताया कि नियमित रूप से मिट्टी की जांच करना जरूरी है ताकि पोषक तत्वों की कमी का पता चल सके और फसलों को उचित पोषण सुनिश्चित किया जा सके।

राज्यपाल ने कहा कि मिजोरम की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और राज्य विशेषज्ञों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के समन्वित प्रयासों से खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सकती है तथा किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है।

इस अवसर पर इंफाल स्थित केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति अनुपम मिश्रा ने भी खाद्यान्न उत्पादन में ऊर्जा की खपत कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भाषा प्रचेता माधव

माधव


लेखक के बारे में