शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद ने बच्चों की किताब में ज़िंदगी और शतरंज के लिए सबक साझा किए
शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद ने बच्चों की किताब में ज़िंदगी और शतरंज के लिए सबक साझा किए
नई दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) मशहूर शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद बच्चों के लिए अपनी नई किताब, ‘लाइटनिंग किड: 64 विनिंग लेसन्स फ्रॉम द बॉय हू बिकेम फाइव-टाइम वर्ल्ड चेस चैंपियन’ ला रहे हैं, जिसमें उन्होंने अपनी ज़िंदगी और करियर के सबसे नाटकीय पलों के साथ-साथ 64 छोटे-छोटे सबक भी बताए हैं- शतरंज की हर चाल के लिए एक सबक।
सुसान निनान के साथ लिखी गई इस किताब को हैचेट इंडिया ने प्रकाशित किया है और यह 13 जनवरी को रिलीज़ होने वाली है।
छप्पन साल के शतरंज ग्रैंडमास्टर ने एक बयान में कहा, ‘‘जब मैं छह साल का था, तो मुझे याद है कि मैंने कहा था कि विश्व चैंपियन बनना सबसे आम ख्वाहिश है, लेकिन पीछे मुड़कर देखें, तो कुछ बनना बहुत आसान है। आपको यह देखना है कि इस सपने को कैसे जिंदा रखना है और उससे कैसे सीखना है, यह मुश्किल हिस्सा है, खासकर जब चीजें अच्छी चल रही हों। जब आप सफल हो रहे होते हैं, तो खतरे की घंटी बजनी चाहिए, लेकिन इंसान होने के नाते, हम अक्सर जोखिम उठाने की हिम्मत के लिए असफलता का इंतजार करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह किताब मेरी कहानी है कि मैंने शतरंज से कैसे सीखा है और अब भी सीख रहा हूं, क्योंकि ये सबक बोर्ड पर तो मदद करते ही हैं, लेकिन ये अक्सर बोर्ड के बाहर, ज़िंदगी नाम के बड़े खेल में भी काम आते हैं।’’
चेन्नई में एक युवा विलक्षण बच्चे के रूप में बड़े होने से लेकर सबसे मुश्किल शतरंज खिलाड़ियों का सामना करके एक वैश्विक किंवदंती बनने तक, आनंद की यात्रा खेल को बदलने वाली चालों और शानदार रणनीतियों एवं रोमांचक मैचों से भरी रही है। उन्हें उनकी तेज चालों के लिए ‘लाइटनिंग किड’ के नाम से जाना जाता था।
यह किताब ऐसी सभी बातों के साथ ही बहुत कुछ को समेटने की कोशिश करती है, चाहे वह दबाव में शांत रहना सीखना हो, हार के बाद वापसी करना हो या कई चालें आगे सोचना हो।
किताब के विवरण में लिखा है, ‘‘यह एक सच्चे चैंपियन की कहानी है- और बड़ा सोचने, विनम्र रहने और अपना सबसे अच्छा खेल खेलने के लिए एक गाइड है, जिसमें आनंद के निजी संग्रह से दुर्लभ तस्वीरें भी हैं।’’
‘लाइटनिंग किड’ इस महीने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल, द हिंदू लिट फॉर लाइफ, और कोलकाता लिटरेरी मीट में भी पेश की जाएगी।
भाषा नरेश नरेश सुरेश
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