एनसीईआरटी पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार संबंधी अध्याय पर प्रधान न्यायाधीश ने आपत्ति जतायी

एनसीईआरटी पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार संबंधी अध्याय पर प्रधान न्यायाधीश ने आपत्ति जतायी

एनसीईआरटी पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार संबंधी अध्याय पर प्रधान न्यायाधीश ने आपत्ति जतायी
Modified Date: February 25, 2026 / 05:03 pm IST
Published Date: February 25, 2026 5:03 pm IST

नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के कक्षा आठ के पाठ्यक्रम में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर एक अध्याय को शामिल करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस धरती पर किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने और उसकी शुचिता को धूमिल नहीं करने दिया जाएगा।

प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी द्वारा मामले को तत्काल विचार के लिए उल्लेखित किये जाने के बाद एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका के बारे में ‘आपत्तिजनक’ बयानों का स्वतः संज्ञान लिया।

कक्षा आठ के लिए एनसीईआरटी की समाज विज्ञान की नयी पाठ्यपुस्तक के अनुसार, भ्रष्टाचार, लंबित मामलों का भारी बोझ और न्यायाधीशों की पर्याप्त संख्या की कमी न्यायिक प्रणाली के समक्ष उत्पन्न ‘‘चुनौतियों’’ में शामिल हैं।

नयी पुस्तक के ‘‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’’ खंड में कहा गया है कि न्यायाधीश एक आचार संहिता से बंधे होते हैं जो न केवल अदालत में उनके व्यवहार को नियंत्रित करती है बल्कि अदालत के बाहर उनके आचरण को भी नियंत्रित करती है।

सिब्बल ने कहा, ‘‘इस संस्था के सदस्य होने के नाते, हमें यह जानकर बहुत दुख हुआ है कि कक्षा आठ के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह एनसीईआरटी की पुस्तक का हिस्सा है। संस्था से हमारा गहरा जुड़ाव है… यह (अध्याय) पूरी तरह से निंदनीय है। हमारे पास किताब की प्रतियां हैं।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मैं आप सभी को आश्वस्त कर सकता हूं कि मुझे इसकी पूरी जानकारी है।’’ उन्होंने कहा कि उन्हें कई फोन और संदेश मिले हैं और कई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ‘‘चिंतित’’ हैं।

जब सिब्बल ने उम्मीद जतायी कि पीठ स्वतः संज्ञान लेगी, तो प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘एक दिन इंतजार कीजिए। यह निश्चित रूप से पूरी संस्था के लिए चिंता का विषय है। बार और पीठ दोनों परेशान हैं। व्यवस्था से जुड़े हर हितधारक वास्तव में परेशान हैं। मुझे बहुत सारे फोन और संदेश मिल रहे हैं। उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी परेशान हैं।’’

प्रधान न्यायाधीश ने सिब्बल को बताया कि उन्होंने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए पहले ही आदेश पारित कर दिया है। नाराज दिख रहे सीजेआई ने कहा, ‘‘मैं धरती पर किसी को भी संस्था की गरिमा को धूमिल करने और संस्था को बदनाम करने नहीं दूंगा। किसी भी कीमत पर मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा। कोई कितना भी बड़े पद या प्रभाव वाला क्यों ना हो, कानून अपना काम करेगा। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है।’’

सिंघवी ने एनसीईआरटी द्वारा अपनाए गए चयनात्मक दृष्टिकोण का मुद्दा उठाया और कहा कि एनसीईआरटी ने यह मान लिया कि ‘अन्यत्र भ्रष्टाचार नहीं है। नौकरशाही, राजनीति, सार्वजनिक जीवन और अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार का कोई उल्लेख नहीं है।’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा और इस मुद्दे को उठाने के लिए वकीलों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि यह एक सोची-समझी कदम है…हम इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहते… मुझे इसकी जानकारी है और मैंने अपना कर्तव्य निभाया है।’’

भाषा अमित माधव

माधव


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