मुख्यमंत्री सुक्खू ने नीति आयोग के समक्ष हिमाचल प्रदेश के प्रमुख मुद्दे उठाए

मुख्यमंत्री सुक्खू ने नीति आयोग के समक्ष हिमाचल प्रदेश के प्रमुख मुद्दे उठाए

मुख्यमंत्री सुक्खू ने नीति आयोग के समक्ष हिमाचल प्रदेश के प्रमुख मुद्दे उठाए
Modified Date: June 11, 2026 / 08:29 pm IST
Published Date: June 11, 2026 8:29 pm IST

शिमला, 11 जून (भाषा) हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपने पहाड़ी राज्य के नुकसान का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि ये नुकसान राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) मिलना बंद होने, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, जलविद्युत परियोजनाओं से उचित मात्रा में मुफ्त बिजली पाने से वंचित होने और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के कारण राजस्व हानि से उत्पन्न हुए हैं।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नई दिल्ली में ‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ विषय पर आयोजित नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में भाग लेते हुए सुक्खू ने कहा कि इन मुश्किलों के बावजूद हिमाचल प्रदेश देश के विकास में योगदान दे रहा है।

उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय समिति को केंद्र को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए ताकि राज्य को उसका उचित हिस्सा मिल सके।

यहां जारी एक बयान में कहा गया है कि शासी परिषद ने दृष्टिकोण को मापने योग्य परिणामों में बदलने और पूरे देश में समावेशी विकास सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।

सुक्खू ने कहा कि आरडीजी के बंद होने से राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कहा कि राज्य को दिए गए 25,000 करोड़ रुपये नुकसान की भरपाई के लिए अपर्याप्त हैं, और उन्होंने इसे बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने की मांग की ताकि राज्य में विकास गतिविधियां आगे बढ़ सकें।

उन्होंने कहा कि भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के एक अध्ययन के अनुसार, हिमाचल प्रदेश देश को 90,000 करोड़ रुपये की पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान करता है, लेकिन पारिस्थितिकी संरक्षण में इसके योगदान के लिए राज्य को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य में उत्पादित 13,000 मेगावाट बिजली में से राज्य को काफी मात्रा में मुफ्त बिजली से वंचित किया जा रहा है और भाखरा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से अभी तक 7,000 करोड़ रुपये का बकाया प्राप्त नहीं हुआ है।

भाषा संतोष माधव

माधव


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