बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने बच्चों के लिए ऑनलाइन खतरों को चिह्नित किया, सुरक्षा उपायों पर जोर दिया

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने बच्चों के लिए ऑनलाइन खतरों को चिह्नित किया, सुरक्षा उपायों पर जोर दिया

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने बच्चों के लिए ऑनलाइन खतरों को चिह्नित किया, सुरक्षा उपायों पर जोर दिया
Modified Date: July 8, 2026 / 04:54 pm IST
Published Date: July 8, 2026 4:54 pm IST

नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने बच्चों के लिए ऑनलाइन खतरों को चिह्नित करते हुए उनके यौन शोषण के खिलाफ मजबूत सुरक्षा उपायों की वकालत की है।

उनका कहना है कि बच्चों के डिजिटल मंचों पर ‘सेक्सटॉर्शन’ और यौन शोषण तथा दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (सीएसईएएम) के संपर्क में आने का खतरा बढ़ रहा है।

पिछले सप्ताह, सरकार ने इंस्टाग्राम पर विज्ञापनों में सीएसईएएम को लेकर मेटा को एक सख्त नोटिस जारी किया था। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम को सीएसईएएम तक पहुंच को बढ़ावा देने और सुविधा प्रदान करने वाले सभी विज्ञापनों और सामग्री को हटाने का आदेश दिया था।

यह कार्रवाई तब हुई जब इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मेटा को नोटिस जारी करें, क्योंकि इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन दिखाए जा रहे थे।

बाल अधिकार वकील और ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ (जेआरसी) के संस्थापक भुवन रिभु ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक ऑनलाइन दुर्व्यवहार के पैमाने को पहचानने में समाज की विफलता है।

ऑनलाइन बाल यौन शोषण को ‘‘सीमाहीन अपराध’’ बताते हुए, रिभु ने कहा कि दुनिया के एक हिस्से में बैठे लोग बिना किसी दंड के कहीं और बैठे हजारों बच्चों के साथ दुर्व्यवहार कर सकते हैं। उन्होंने ऐसे अपराधों से निपटने के लिए विश्व स्तर पर स्वीकृत मानदंडों और कानूनी ढांचे की कमी पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे मामलों में देश की सीमा से बाहर अधिकार-क्षेत्र से निपटने वाले वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य नियमों, नीतियों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की कमी है।’’

रिभु ने कहा, ‘‘लोग इन मामलों की रिपोर्ट नहीं कर रहे हैं। ऐसे मामलों की शिकायत से बचा जाता है… अगर बच्चे को धमकी दी जा रही है और वह कोई तस्वीर साझा करता है, तो ज्यादातर मामलों में माता-पिता बच्चे को ही दोषी ठहराते हैं।’’

उन्होंने बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के प्रसार को रोकने में मध्यस्थों और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं की सीमित जवाबदेही की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।

रिभु ने मंत्रालय द्वारा मेटा को नोटिस जारी करने के कदम का स्वागत करते हुए इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए सख्त कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय समन्वय तंत्र की आवश्यकता है।

‘चाइल्ड राइट्स एंड यू’ (सीआरवाई) की क्षेत्रीय निदेशक (उत्तर) सोहा मोइत्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा का दायरा साइबर अपराध से कहीं ज्यादा बड़ा है और यह बच्चों के अधिकारों से जुड़ा एक अहम मुद्दा बन गया है।

उन्होंने कहा कि एआई-आधारित प्रौद्योगिकियों, गेमिंग और ऑनलाइन मंचों के जरिये बच्चों के यौन दुव्यर्वहार की आशंका काफी बढ़ गई है।

एनसीआरबी के 2024 के आंकड़ों के सीआरवाई के विश्लेषण का हवाला देते हुए, मोइत्रा ने कहा कि 2024 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के 1,238 मामले दर्ज किए गए, और इनमें से लगभग 89 प्रतिशत यानी 1099 मामलों में, बच्चों को यौन गतिविधियों में शामिल दिखाते हुए सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से जुड़े मामले शामिल थे।

मोइत्रा ने कहा कि आपत्तिजनक सामग्री अपलोड होने के बाद उसे हटाना काफी नहीं है और ऑनलाइन मंचों को बचाव वाला तरीका अपनाना चाहिए।

भाषा शफीक वैभव

वैभव


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