सीआईसी ने जेल में बंद अपीलकर्ता की सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप किया

सीआईसी ने जेल में बंद अपीलकर्ता की सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप किया

सीआईसी ने जेल में बंद अपीलकर्ता की सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप किया
Modified Date: April 13, 2026 / 08:59 pm IST
Published Date: April 13, 2026 8:59 pm IST

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने ‘‘जीवन और स्वतंत्रता’’ से संबंधित एक मामले में हस्तक्षेप करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि जेल में बंद आरटीआई याचिकाकर्ता को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिले। आयोग ने जेल अधिकारियों और उच्चतम न्यायालय की विधिक सेवा समिति को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।

आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अपीलकर्ता का पक्ष जानना आवश्यक है, और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।

यह मामला सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत एक आवेदन से संबंधित है, जिसमें अपीलकर्ता ने अपनी अर्जी पर की गई कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी, और इसे अपने ‘जीवन और स्वतंत्रता’ से संबंधित मामला बताया था। हालांकि, निर्धारित समय के भीतर कोई जवाब नहीं दिया गया, और पहली अपील पर भी कोई फैसला नहीं हुआ।

मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल ने आदेश पारित करते हुए निर्देश दिया कि मामले को दो सप्ताह के भीतर पुनः सूचीबद्ध किया जाए और रजिस्ट्री को संबंधित जेल प्रशासन के साथ समन्वय करने के लिए कहा, ताकि अगली सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपीलकर्ता की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।

आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे अपीलकर्ता निर्धारित समय पर जेल से कार्यवाही में शामिल हो सके।

आयोग ने उच्चतम न्यायालय की विधिक सेवा समिति को दूसरी अपील के संबंध में सात दिन के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करने और सुनवाई से पहले अपीलकर्ता के साथ उसकी एक प्रति साझा करने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान, प्रतिवादी प्राधिकार ने यह दलील दी कि उसके कार्यालय में कोई आरटीआई आवेदन या पहली अपील प्राप्त नहीं हुई थी, हालांकि उसने स्वीकार किया कि अपीलकर्ता की ओर से कानूनी सहायता के अनुरोध पर कार्रवाई की गई थी।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में