नागरिक अधिकार संगठन ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से ‘जबरन हटाए जाने’ की निंदा की
नागरिक अधिकार संगठन ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से ‘जबरन हटाए जाने’ की निंदा की
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) एक नागरिक अधिकार संगठन ने जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से “जबरन हटाए जाने” के दिल्ली पुलिस के कदम की रविवार को आलोचना की।
संगठन ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की आजादी के लोकतांत्रिक अधिकार पर हमला है।
‘जनहस्तक्षेप’ ने एक बयान में दावा किया कि देश भर के छात्र और युवा कोचिंग संस्थानों के कथित भ्रष्टाचार और “शोषण” से बहुत परेशान हैं।
संगठन के संयोजक विकास बाजपेयी और सह-संयोजक अनिल दुबे ने आरोप लगाया कि अभिभावक अपने बच्चों की शिक्षा और भविष्य को लेकर लगातार चिंतित हैं, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें इन चिंताओं को दूर करने के बजाय शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को बढ़ावा दे रही हैं।
‘जनहस्तक्षेप’ ने कहा कि उच्च शिक्षा में “भ्रष्टाचार, व्यावसायीकरण और कुप्रबंधन” को लेकर केंद्र सरकार से “जवाबदेही” की मांग को लेकर वांगचुक पिछले 21 दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
संगठन ने कहा कि 18 जुलाई की सुबह पुलिस ने वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से “जबरन हटा दिया”, जो “बेहद निंदनीय” है, क्योंकि ऐसा करते हुए आंदोलन की शांतिपूर्ण प्रकृति को “नजरअंदाज” किया गया।
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप

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