कोयला अर्थव्यवस्था, पहचान की राजनीति से तय होगी आसनसोल दक्षिण में मुकाबले की दिशा

कोयला अर्थव्यवस्था, पहचान की राजनीति से तय होगी आसनसोल दक्षिण में मुकाबले की दिशा

कोयला अर्थव्यवस्था, पहचान की राजनीति से तय होगी आसनसोल दक्षिण में मुकाबले की दिशा
Modified Date: April 1, 2026 / 03:40 pm IST
Published Date: April 1, 2026 3:40 pm IST

(सुप्रतीक सेनगुप्ता)

आसनसोल (पश्चिम बंगाल), एक अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अहम माने जा रहे विधानसभा क्षेत्रों में शामिल आसनसोल दक्षिण में कोयला अर्थव्यवस्था की स्थिति में गिरावट, पहचान की राजनीति और अवैध खनन जैसे मुद्दे मुकाबले को प्रभावित कर सकते हैं।

यह विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। रानीगंज कोयला पट्टी में स्थित यह शहरी-औद्योगिक सीट पूर्वी भारत के पुराने खनन नगरों में हो रहे संरचनात्मक बदलाव को दर्शाती है, जहां औद्योगिक सुस्ती, अनौपचारिक कोयला नेटवर्क और जनसांख्यिकीय बदलाव राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2021 में यह सीट तृणमूल कांग्रेस से छीन ली थी। भाजपा हिंदुत्व लामबंदी और कोयला अर्थव्यवस्था से जुड़े शासन संबंधी मुद्दों के सहारे इसे बरकरार रखने की कोशिश कर रही है।

सत्तारूढ़ तृणमूल अपने पारंपरिक बंगाली-अल्पसंख्यक समर्थन आधार को फिर से मजबूत कर और राज्य सरकार की विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं के सहारे इस सीट पर विजय प्राप्त करने का प्रयास कर रही है।

भाजपा ने इस सीट से मौजूदा विधायक अग्निमित्रा पॉल को फिर उम्मीदवार बनाया है जबकि तृणमूल ने पूर्व विधायक तापस बनर्जी को मैदान में उतारा है। तापस ने 2011 और 2016 में इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शिल्पी चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया है और कांग्रेस ने सौविक मुखर्जी को मैदान में उतारा है।

पॉल ने 2021 में तृणमूल उम्मीदवार सायोनी घोष को 4,487 मतों से हराया था, जिसे तृणमूल समर्थक माने जाने वाले शहरी क्षेत्र में भाजपा की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा गया था लेकिन 2022 के लोकसभा उपचुनाव में आसनसोल क्षेत्र में भाजपा की संगठनात्मक ताकत को उस समय झटका लगा, जब तृणमूल उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा ने भारी अंतर से जीत दर्ज की।

इस निर्वाचन क्षेत्र का राजनीतिक विमर्श कोयला खनन से जुड़े औपचारिक रोजगार में लंबे समय से जारी गिरावट से प्रभाावित रहा है।

रानीगंज कोयला क्षेत्र कभी हजारों श्रमिकों को स्थिर रोजगार देता था लेकिन स्वचालन और पुनर्गठन के कारण प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर कम हो गए हैं जिससे बहुत से लोग अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करने या पलायन के लिए मजबूर हो गए।

इसके साथ ही, अवैध कोयला उत्खनन के नेटवर्क आर्थिक रूप से कमजोर आबादी के कुछ तबकों को आजीविका उपलब्ध कराते रहे हैं जिससे प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो जाती है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि औपचारिक नौकरियों के कम होने और अनौपचारिक खनन के बने रहने के कारण एक जटिल सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि तैयार हुई है जो मतदाताओं के चयन को प्रभावित करेगी।

दशकों से जारी वैध और अवैध, दोनों तरह के खनन के कारण निर्वाचन क्षेत्र के कई हिस्सों में जमीन धंसने की समस्या एक अन्य बड़ा मुद्दा है।

आसनसोल दक्षिण का मतदाता आधार सामाजिक रूप से विविध है, जिसे दशकों के श्रमिक पलायन ने आकार दिया है। मुख्य रूप से बिहार एवं झारखंड से आए हिंदीभाषी मतदाता कुल मतदाताओं का लगभग 35-40 प्रतिशत हैं।

इस क्षेत्र में चुनाव के पहले चरण में 23 अप्रैल को मतदान होगा और चार मई को मतगणना होगी।

भाषा

सिम्मी नरेश

नरेश


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