तटरक्षक बल का प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ सोमवार को सेवा में शामिल होगा

तटरक्षक बल का प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ सोमवार को सेवा में शामिल होगा

तटरक्षक बल का प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ सोमवार को सेवा में शामिल होगा
Modified Date: January 4, 2026 / 03:50 pm IST
Published Date: January 4, 2026 3:50 pm IST

नयी दिल्ली, चार जनवरी (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को पांच जनवरी को भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) बल की सेवा में शामिल करेंगे। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि भारतीय तटरक्षक का स्वदेशी रूप से निर्मित यह पहला प्रदूषण नियंत्रण पोत है। 114.5 मीटर लंबे इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है। पोत का वजन 4,200 टन है और इसकी गति 22 नॉट से अधिक की है।

यह पोत समुद्री प्रदूषण नियंत्रण नियमों को लागू करने, समुद्री कानून प्रवर्तन, खोज और बचाव अभियानों और भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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इस पोत को औपचारिक रूप से दिसंबर में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में तटरक्षक बल को सौंप दिया गया था।

भारतीय तटरक्षक बल ने एक पोस्ट में कहा, ‘‘तटरक्षक के पोत समुद्र प्रताप को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पांच जनवरी को गोवा स्थित गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में सेवा में शामिल करेंगे। यह दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला पोत है।’’

तटरक्षक बल ने पोत का एक छोटा वीडियो क्लिप भी साझा किया, जिसे बल का सबसे बड़ा और सबसे उन्नत प्रदूषण नियंत्रण पोत बताया जा रहा है।

तटरक्षक बल ने कहा, ‘‘जीएसएल द्वारा 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित, 114.5 मीटर लंबा और 4,200 टन वजन वाला यह पोत 22 नॉट से अधिक की गति से संचालित हो सकता है। इस पोत से आईसीजी की प्रदूषण नियंत्रण, अग्निशमन और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।’

आईसीजी ने पूर्व में कहा था कि यह तेल रिसाव का पता लगाने के लिए उन्नत प्रणालियों से सुसज्जित है, जैसे कि ‘ऑयल फिंगरप्रिंटिंग मशीन’, ‘जाइरो स्टेबलाइज्ड स्टैंडऑफ एक्टिव केमिकल डिटेक्टर’ और पीसी लैब उपकरण।

अधिकारियों ने कहा कि इस पोत के सेवा में शामिल होने से भारत की समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता मजबूत होगी और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को बल मिलेगा।

भाषा आशीष संतोष

संतोष


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