सातवें पनडुब्बी रोधी जलपोत ‘मछलीपटनम’ का जलावतरण

सातवें पनडुब्बी रोधी जलपोत ‘मछलीपटनम’ का जलावतरण

सातवें पनडुब्बी रोधी जलपोत ‘मछलीपटनम’ का जलावतरण
Modified Date: July 30, 2026 / 12:22 am IST
Published Date: July 30, 2026 12:22 am IST

(फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) की ओर से भारतीय नौसेना के लिए निर्मित आठ पनडुब्बी रोधी जलपोतों (एएसडब्ल्यू) में से सातवें जलपोत ‘मछलीपटनम’ का बुधवार को जलावतरण किया गया।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सातवां पनडुब्बी रोधी जलपोत ‘मछलीपटनम’ समुद्र के भीतर निगरानी, ​​पनडुब्बी रोधी युद्ध (एएसडब्ल्यू) अभियान और कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान (एलआईएमओ) के साथ-साथ बारूदी सुरंग भेदन क्षमता से लैस है।

मंत्रालय ने कहा कि यह जलपोत तटीय रक्षा को और मजबूत करेगा तथा समुद्री क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि इस पोत का गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है, क्योंकि इसका नाम आंध्र प्रदेश के ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मछलीपटनम से लिया गया है।

उन्होंने कहा कि यह पोत मछलीपटनम की भावना और विरासत का प्रतीक है।

अधिकारियों के मुताबिक, मछलीपटनम राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा के लिए भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।

अधिकारियों ने कहा कि ‘मछलीपटनम’ के 80 फीसदी से अधिक कलपुर्जे स्वदेशी हैं, जो भारतीय पोत निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित करता है।

उन्होंने कहा कि यह पोत हिंद महासागर क्षेत्र में राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा के लिए भारतीय नौसेना की परिचालन तत्परता को काफी हद तक बढ़ाएगा।

भाषा

देवेंद्र पारुल

पारुल


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