खेती और तकनीक का संगम ही विकसित भारत का आधार: रेखा गुप्ता

खेती और तकनीक का संगम ही विकसित भारत का आधार: रेखा गुप्ता

खेती और तकनीक का संगम ही विकसित भारत का आधार: रेखा गुप्ता
Modified Date: April 1, 2026 / 05:43 pm IST
Published Date: April 1, 2026 5:43 pm IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को खेती और तकनीक के संगम को विकसित भारत का आधार बताते हुए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों से जल स्तर में सुधार, कृषि विकास और शहरी खेती को बढ़ावा देने में योगदान का आह्वान किया।

गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताते हुए अधिक वृक्षारोपण, ‘वर्टिकल गार्डनिंग’, (दीवार, जाली, स्टैंड या पाइप पर पौधे लगाना) जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर जोर दिया।

गुप्ता ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईएआरआई) के 122वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कि कहा कि उनकी सरकार ने पहली बार रिज क्षेत्र के लगभग 4200 हेक्टेयर को अधिसूचित कर हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाया है और आईएआरआई से मिट्टी की उर्वरता, शहरी हरियाली व वैज्ञानिक पौधरोपण के लिए सहयोग मांगा है।

उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों से जल स्तर में सुधार, कृषि विकास और शहरी खेती को बढ़ावा देने में योगदान का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने खेतों को प्रयोगशालाओं से जोड़ते हुए हरित क्रांति से लेकर आधुनिक तकनीकों तक भारत की खेती को नई दिशा दी है और खाद्य सुरक्षा व आत्मनिर्भरता को मजबूत किया है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘खाद्यान्न, पोषण और आजीविका सुरक्षा के लिए उन्नत फसल किस्में’ और ‘प्रिसिशन फ्लोरिकल्चर व लैंडस्केप डिजाइन’ पर आधारित पुस्तकों का विमोचन भी किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने संस्थान में लगी प्रदर्शनी का दौरा भी किया।

इस अवसर पर दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री रवीन्द्र इन्द्राज सिंह और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सचिव एवं महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट समेत कई लोग उपस्थित थे।

दिल्ली के समाज कल्याण, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री सिंह ने कहा कि दिल्ली के पारंपरिक जल स्रोतों को संरक्षित करना और पुनर्जीवित करना बेहद जरूरी है क्योंकि इससे दिल्ली के जल स्तर और पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा।

भाषा नोमान नोमान पवनेश

पवनेश


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