मणिपुर हिंसा की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट जारी की जाए: कांग्रेस

मणिपुर हिंसा की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट जारी की जाए: कांग्रेस

मणिपुर हिंसा की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट जारी की जाए: कांग्रेस
Modified Date: May 14, 2026 / 08:14 pm IST
Published Date: May 14, 2026 8:14 pm IST

नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) कांग्रेस ने मणिपुर में हुई हिंसा की हालिया घटनाओं की निंदा की और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्य के लोगों के जान-माल की रक्षा करने में विफल रही है।

पार्टी सांसद ए. विमल अकोइजम ने यह भी कहा कि सरकार को मणिपुर हिंसा की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट जारी करनी चाहिए और सशस्त्र समूहों के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में बीते बुधवार को संदिग्ध उग्रवादियों के हमले में चर्च के तीन पदाधिकारियों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।

पुलिस के अनुसार, यह घटना कोट्जिम और कोटलेन गांवों के बीच उस समय घटी जब थाडौ बैपटिस्ट एसोसिएशन (टीबीए) के सदस्य एक धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद चुराचांदपुर से लौट रहे थे।

अकोइजम ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारी पार्टी ने लगातार मांग की है कि सरकार मणिपुर के लोगों के जान-माल की रक्षा करे, लेकिन वह ऐसा करने में विफल रही है। हम इस हिंसा और भारत सरकार के अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कड़ी निंदा करते हैं। हमारी यह मांग भी है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।’’

उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार को मणिपुर में हिंसा रोकने की फिक्र नहीं है।

अकोइजम ने कहा, ‘‘हम भारत सरकार से उस जांच आयोग की रिपोर्ट जारी करने की अपील करते हैं, जिसके अध्यक्ष वर्तमान में सेवानिवृत्त न्यायाधीश बलबीर सिंह चौहान हैं।’’

उनका कहना था कि इस हिंसा के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए और इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए।

अकोइजम ने कहा, ‘‘सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और बेखौफ होकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे सशस्त्र समूहों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। एक जिम्मेदार पार्टी के रूप में हम मांग करते हैं कि भारत सरकार मणिपुर के नागरिकों के जान-माल की रक्षा करे।’’

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा मणिपुर हिंसा की जांच के लिए चार जून, 2023 को जांच आयोग का गठन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता मूल रूप से गुवाहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय लांबा कर रहे थे। लांबा ने इस साल की शुरुआत में इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बलबीर सिंह चौहान को इस आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

भाषा

हक प्रशांत

प्रशांत


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