नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चीन-पाकिस्तान की मिलीभगत के मुद्दे पर पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल (सेवानिवृत्त) अनिल चौहान की टिप्पणी को लेकर बृहस्पतिवार को सवाल खड़े किए और कहा कि क्या चीन को खुश करने के लिए मोदी सरकार की ओर से ‘‘कहानी बदलने’’ की कोई ‘‘गहरी योजना’’ है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर वर्ष 2025 में उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह और इस सप्ताह की शुरुआत में चौहान द्वारा की गई टिप्पणियों वाले वीडियो साझा किए।
रमेश ने कहा, ‘‘चार जुलाई, 2025 को उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान-चीन की मिलीभगत की बेहद चिंताजनक गहराई का खुलासा किया था। पच्चीस अगस्त 2026 को पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने इसी मिलीभगत को लेकर अपने खुलासे किए, जो लेफ्टिनेंट जनरल सिंह की बात के बिल्कुल विपरीत हैं। इससे देश असमंजस में है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह सब क्या हो रहा है? क्या कहानी बदलने की कोई गहरी योजना है? क्या यह मोदी सरकार की चीन के प्रति उस सोची-समझी नरमी का हिस्सा है, जो जून 2020 में प्रधानमंत्री द्वारा चीन को दी गई ‘कुख्यात क्लीन चिट’ और चीन के साथ रिकॉर्ड व्यापार घाटे के बाद से स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है? देश को जानना जरूरी है।’’
उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने 2025 में कहा था कि चीन ने मई में हुए चार-दिवसीय भारत-पाकिस्तान संघर्ष को विभिन्न हथियार प्रणालियों का परीक्षण करने के लिए ‘‘लाइव लैब’’ की तरह इस्तेमाल किया और वह इस्लामाबाद को हरसंभव सहायता दे रहा था।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा था कि पाकिस्तान ‘‘सामने का चेहरा’’ था, जबकि चीन अपने सदाबहार सहयोगी को हरसंभव सहायता दे रहा था।
वहीं, बीते मंगलवार को पूर्व सीडीएस चौहान ने कहा कि पाकिस्तान के पास मौजूद सैन्य साधन (मिलिट्री प्लेटफॉर्म) का ‘‘70 या 80 प्रतिशत’’ हिस्सा चीनी मूल का है, चाहे वे थल, वायु या नौसेना के प्लेटफॉर्म हों।
चौहान ने कहा था, ‘‘हमारे पास भी विदेशी प्लेटफॉर्म का एक बेड़ा है और जब हम ये प्लेटफॉर्म लेते हैं तो उनका रखरखाव और सेवा-योग्यता मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) की जिम्मेदारी होती है। उनके प्रतिनिधि आमतौर पर उन देशों में मौजूद होते हैं, जहां उपकरण तैनात होते हैं, क्योंकि उन्हें सक्रिय हालत में रखना होता है। युद्ध में इनका इस्तेमाल किया जा रहा है और अगर युद्ध के दौरान यह उपकरण उपलब्ध नहीं होगा तो इसका क्या फायदा?’’
उन्होंने कहा था कि चीनी ओईएम के लोग वहां मौजूद रहे होंगे और ‘‘चीन ने भी स्वीकार किया है कि उनके लोग वहां थे, इसलिए इसमें कुछ नया नहीं है।’’
चौहान ने कहा था, ‘‘आज हमारे देश में भी ऐसे उपकरणों के लिए रूसी ओईएम, फ्रांसीसी, इजराइली ओईएम के प्रतिनिधि हो सकते हैं, जिनका इस्तेमाल हम कर रहे हैं। यह एक संविदात्मक दायित्व है, जिसे हमें समझना चाहिए।’’
उन्होंने यह भी कहा था कि उपग्रह से प्राप्त तस्वीरें व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हैं और यह कहना सही नहीं होगा कि चीन द्वारा पाकिस्तान को उपग्रह तस्वीरें उपलब्ध कराने से उसे किसी तरह की खुफिया जानकारी मिली होगी।
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