पूजा पंडालों में मुख्यमंत्री की तस्वीर अनिवार्य करने की बीरभूम भाजपा प्रमुख की टिप्पणी पर विवाद

पूजा पंडालों में मुख्यमंत्री की तस्वीर अनिवार्य करने की बीरभूम भाजपा प्रमुख की टिप्पणी पर विवाद

पूजा पंडालों में मुख्यमंत्री की तस्वीर अनिवार्य करने की बीरभूम भाजपा प्रमुख की टिप्पणी पर विवाद
Modified Date: September 23, 2026 / 10:17 pm IST
Published Date: September 23, 2026 10:17 pm IST

सैंथिया/कोलकाता, 23 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल में बीरभूम जिले के सैंथिया में दुर्गा पूजा आयोजकों से राज्य सरकार का अनुदान स्वीकार करने पर पंडालों में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तस्वीर लगाने को कहने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का कहना है कि ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है।

भाजपा की बीरभूम जिला इकाई के अध्यक्ष उदय शंकर बंद्योपाध्याय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां तृणमूल कांग्रेस के उन कार्यकर्ताओं पर लक्षित थीं, जिन्होंने नेता प्रतिपक्ष रहते हुए शुभेंदु के सैंथिया दौरे के दौरान कथित तौर पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया था और अब खुद को उनका शुभचिंतक बताने की कोशिश कर रहे हैं।

मंगलवार को यहां दुर्गा पूजा आयोजकों के साथ एक बैठक के दौरान बंद्योपाध्याय ने कहा था कि सरकारी अनुदान स्वीकार करने वालों के लिए पूजा पंडालों में मुख्यमंत्री की तस्वीर लगाना अनिवार्य है और उन्होंने इस पर अमल न करने वालों पर ‘‘सख्त कार्रवाई’’ की चेतावनी दी थी।

बयान को लेकर विवाद खड़ा होने के बाद बंद्योपाध्याय ने कहा कि उनका इशारा केवल उन लोगों की ओर था, जो पहले शुभेंदु के शहर के दौरे के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार करते थे, लेकिन अब खुद को ‘अच्छा’ तृणमूल कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बताने का दावा कर रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने भाजपा नेता की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया था।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मौजूदा व्यवस्था और पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के बीच यही अंतर है।’’

घोष ने सामुदायिक दुर्गा पूजा आयोजकों को सरकारी अनुदान देने की शुरुआत बनर्जी सरकार द्वारा किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी पंडाल में अपनी तस्वीर लगाने के लिए कभी नहीं कहा।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों -दिलीप घोष और सुकांत मजूमदार- ने बंद्योपाध्याय की टिप्पणियों से पार्टी को अलग करने का प्रयास करते हुए कहा कि उनकी पार्टी की सरकार मुख्यमंत्री की तस्वीर लगाने का ऐसा कोई आदेश नहीं देगी। उन्होंने कहा कि ऐसे काम पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार में होते थे।

दिलीप घोष ने दावा किया, ‘‘पहले यह एक शर्त होती थी; यदि ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं लगाई जाती थी तो आर्थिक सहायता को रोक दिया जाता था और नेता उस धन से ‘कट मनी’ भी लेते थे।’’

घोष ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारी सरकार ने मुख्यमंत्री की तस्वीर लगाने का कोई निर्देश जारी नहीं किया है। आप मां दुर्गा की पूजा कर रहे हैं – इसे सही तरीके से करें।’’

भाषा खारी सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में