नैनीताल, 21 जुलाई (भाषा) एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कॉर्बेट बाघ अभयारण्य में कथित भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के मामले में सतर्कता विभाग द्वारा दर्ज दो आपराधिक मामलों को हल्द्वानी की एक अदालत से देहरादून की विशेष भ्रष्टाचार निरोधक (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) न्यायालय में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की एकल पीठ ने माना कि समानांतर कार्यवाही से बचने और निष्पक्ष व कानूनी रूप से सही मुकदमा चलाने के लिए यह स्थानांतरण ज़रूरी है और इस संबंध में सीबीआई की अर्जी को स्वीकार कर लिया।
उच्च न्यायालय ने पाया कि सीबीआई ने इस मामले की अपनी विस्तृत जांच पहले ही पूरी कर ली है और देहरादून में विशेष सीबीआई अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि हल्द्वानी में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के सामने सतर्कता मामलों को जारी रखने से अधिकार-क्षेत्र को लेकर विवाद और प्रक्रिया में विसंगतियां पैदा हो सकती हैं।
ये दोनों मामले मूल रूप से 2022 में सतर्कता विभाग की हल्द्वानी (नैनीताल सेक्टर) इकाई ने कॉर्बेट बाघ अभयारण्य में कथित वित्तीय अनियमितताओं, अवैध निर्माण और बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के सिलसिले में दर्ज किए थे।
अब ताज़ा आदेश के बाद सतर्कता के दोनों मामलों की सुनवाई देहरादून की विशेष सीबीआई अदालत करेगी जो पहले से ही इस मामले में सीबीआई के आरोप पत्र पर सुनवाई कर रही है।
सीबीआई ने आठ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को आरोपी बनाया है, जिनमें कॉर्बेट बाघ अभयारण्य के तत्कालीन निदेशक राहुल, पूर्व उप वन संरक्षक/ प्रभागीय वन अधिकारी किशन चंद और पूर्व उप वन संरक्षक अखिलेश तिवारी शामिल हैं। उन पर वित्तीय अनियमितताओं, पेड़ों की अवैध कटाई और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं।
अन्य आरोपियों में पूर्व रेंज अधिकारी बृज बिहारी शर्मा, उप रेंजर मथुरा सिंह मावड़ी, वन अधिकारी सुरेंद्र सिंह, वन रक्षक संदीप आर्या और दिहाड़ी पर काम करने वाला वायरलेस ऑपरेटर राजेश रावत शामिल है।
सभी आठ आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, वन (संरक्षण) अधिनियम, भारतीय वन अधिनियम और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
उच्च न्यायालय ने कहा कि मामलों को एक ही अदालत में स्थानांतरित करने से मुकदमा सुचारू, प्रभावी और तकनीकी रूप से एकसमान तरीके से चल सकेगा।
भाषा सं दीप्ति धीरज
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