न्यायालय ने न्यायाधीश पर अनुचित टिप्पणी करने वाले वकील को बिना शर्त माफी मांगने को कहा

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न्यायालय ने न्यायाधीश पर अनुचित टिप्पणी करने वाले वकील को बिना शर्त माफी मांगने को कहा

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  • Publish Date - January 23, 2026 / 03:54 PM IST,
    Updated On - January 23, 2026 / 03:54 PM IST

नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को झारखंड के एक वकील से कहा कि वह स्वत: संज्ञान के तहत शुरू की गयी अवमानना कार्यवाही के मामले में संबंधित उच्च न्यायालय के समक्ष बिना शर्त माफी मांगे। यह कार्यवाही अदालत में हुई एक बहस से संबंधित वायरल वीडियो से जुड़ी है, जिसमें वकील ने कथित तौर पर एक न्यायाधीश से कहा था, ‘‘हद मत पार कीजिए।’’

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए महेश तिवारी को यह छूट दी कि वह उच्च न्यायालय की पांच-सदस्यीय उस पीठ के समक्ष बिना शर्त माफीनामा दाखिल कर सकते हैं, जिसने उनके खिलाफ पिछले वर्ष अक्टूबर में अवमानना नोटिस जारी किया था।

शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय से माफी पर ‘‘सहानुभूतिपूर्वक’’ विचार करने का अनुरोध भी किया।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘आपराधिक अवमानना नोटिस से आहत होकर याचिकाकर्ता हमारे पास आया है…. (याचिका में) विस्तार से यह स्पष्ट किया गया है कि याचिकाकर्ता का उद्देश्य माननीय न्यायाधीश का अपमान करना या न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालना नहीं था… वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि याचिकाकर्ता अत्यंत पश्चाताप में है और बिना शर्त माफी मांगने को तैयार है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उपरोक्त रुख को देखते हुए हम याचिका का निपटारा करते हैं और याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय में बिना शर्त माफीनामा दाखिल करने की छूट देते हैं। हम उच्च न्यायालय से अनुरोध करते हैं कि वह इस माफी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे।’’

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उनके मुवक्किल ‘‘बेहद पश्चाताप’’ कर रहे हैं और बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार हैं।

हालांकि, पीठ ने वकील के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताई।

सीजेआई ने वकील के कथित अड़ियल रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘वह न्यायाधीशों के सामने यह बात क्यों नहीं समझा सकते? यह उसका जिद्दी स्वभाव है। उन्हें उनके सामने जाने दीजिए…… वह समझाए। अगर वह वहां आंख दिखाना चाहते हैं…तो दिखाने दीजिए, फिर हम देखेंगे। हमें पता है इससे कैसे निपटना है।’’

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने भी अदालत की गरिमा से जुड़े मानकों में गिरावट का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ‘‘न्यायपालिका के हर स्तर पर… ऐसी समस्याएं हैं… जहां टकराव पैदा करना पेशेवर गर्व का विषय बन जाता है।’’

दवे ने कहा कि लाइव-स्ट्रीमिंग के दौर में नई चुनौतियां पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अदालती सुनवाई की ये वीडियो कार्यवाही एक आफत बन गई है। वकील के खिलाफ नोटिस ही उसके करियर को तबाह करने के लिए काफी है।’’

यह विवाद पिछले वर्ष 16 अक्टूबर का है, जब झारखंड उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति राजेश कुमार के समक्ष सुनवाई हुई थी। एक मुवक्किल की ओर से पेश वकील बिजली कनेक्शन बहाल कराने का अदालत से अनुरोध कर रहे थे।

वकील ने 25,000 रुपये जमा कराने की पेशकश की थी, लेकिन अदालत ने कुल बकाया राशि का 50 प्रतिशत जमा कराने से जुड़े पुराने फैसलों का हवाला दिया। बाद में 50,000 रुपये जमा कराने पर मामला सुलझ गया, लेकिन सुनवाई के बाद स्थिति बिगड़ गई।

बताया जाता है कि न्यायमूर्ति कुमार ने वकील के बहस करने के तरीके पर टिप्पणी की और झारखंड राज्य विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष से उनके आचरण पर संज्ञान लेने को कहा।

इसके बाद वकील ने पीठ के पास जाकर कहा कि वह ‘‘अपने तरीके से बहस करेंगे’’ और उन्होंने न्यायाधीश से कहा, ‘‘हद मत पार कीजिए।’’

लाइव-स्ट्रीम वाली इस सुनवाई की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी थी।

इसके बाद उच्च न्यायालय की पांच-सदस्यीय पीठ ने मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए वकील को नोटिस जारी किया था।

भाषा गोला सुरेश

सुरेश