न्यायालय ने महिला की गरिमा भंग करने से संबंधित प्राथमिकी को लेकर पुलिस के आचरण की निंदा की
न्यायालय ने महिला की गरिमा भंग करने से संबंधित प्राथमिकी को लेकर पुलिस के आचरण की निंदा की
नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के अपराध से संबंधित प्रत्येक प्राथमिकी में एक विशेष हिंदी मुहावरे के इस्तेमाल को लेकर पुलिस के आचरण की कड़ी निंदा की और कहा है कि यह कानून का घोर दुरुपयोग है।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा कुछ आरोपियों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थीं, जिसमें शराब के नशे में एक महिला इवेंट मैनेजर पर हमला करने के आरोप में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया गया था।
न्यायालय ने 17 दिसंबर के एक आदेश में कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आईपीसी की धारा 354 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत दर्ज प्रत्येक प्राथमिकी में ‘हाथ मारा’ शब्द लिखा जा रहा है, जिसका शिकायतकर्ता द्वारा समर्थन नहीं किया जा रहा है। यह कानून का घोर दुरुपयोग है और पुलिस थानों के स्तर पर आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है।’’
न्यायाधीश ने संबंधित पुलिस उपायुक्त को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि शिकायतों में कोई मनगढ़ंत आरोप न डाले जाएं।
इस बीच, अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया, यह देखते हुए कि दोनों पक्षों ने अपने विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया था।
भाषा
देवेंद्र माधव
माधव

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