न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जेलों पर अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया
न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जेलों पर अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया
नयी दिल्ली, 22 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे जेलों से संबंधित अद्यतन जानकारी 18 मई तक उपलब्ध कराएं, जिसमें प्रत्येक जेल में कैदियों की स्वीकृत संख्या और क्षमता से अधिक कैदी रखने से रोकने के लिए उठाए गए कदम शामिल हों।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी कहा कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में महिला जेलों की संख्या और उनमें उपलब्ध सुविधाओं का ब्योरा दें। पीठ ने कहा कि साथ ही महिला कैदियों के साथ रहने वाले बच्चों की शिक्षा और समग्र कल्याण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी दें।
पीठ ने कहा कि जेलों में अमानवीय परिस्थितियों से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले में न्यायालय की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत आंकड़े 2023 के हैं।
पीठ ने कहा कि मामले की प्रकृति और प्रभावी निर्णय के लिए अद्यतन और समकालीन आंकड़ों का उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है।
उच्चतम न्यायालय ने 17 मार्च को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘अतः हम यह उचित समझते हैं कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने अधिकार क्षेत्र की सभी जेलों से संबंधित अद्यतन और व्यापक आंकड़े रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करें।’’
न्यायालय ने कहा कि इन आंकड़ों में प्रत्येक जेल की क्षमता, कुल कैदियों की संख्या, हर जेल में भीड़भाड़ का प्रतिशत, इसे कम करने के प्रस्तावित उपाय, महिला जेलों का विवरण, महिला कैदियों और उनके साथ रहने वाले बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाएं (शैक्षिक और चिकित्सीय सुविधाएं सहित), जेल कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या, मौजूदा रिक्तियां और उन्हें भरने के लिए उठाए गए कदम तथा जेल प्रशासन से जुड़े अन्य सभी पहलू शामिल होने चाहिए।
पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे एक मार्च 2026 तक प्रत्येक जेल की स्वीकृत क्षमता और उसमें बंद कैदियों की कुल संख्या का पूरा विवरण प्रस्तुत करें।
शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 18 मई तक अपने-अपने गृह सचिव द्वारा सत्यापित विस्तृत हलफनामे दाखिल करेंगे, जिनमें आवश्यक जानकारी दी जाएगी।
मामले की अगली सुनवाई 26 मई को तय की गई है।
भाषा गोला अमित
अमित

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