अदालत ने ट्रेन से गिरने का दावा करने वाले व्यक्ति की मुआवजा याचिका खारिज की
अदालत ने ट्रेन से गिरने का दावा करने वाले व्यक्ति की मुआवजा याचिका खारिज की
नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2015 में ट्रेन से गिरने और हादसे के बाद दोनों हाथ कटने का दावा करते हुए मुआवजे के लिए एक यात्री की ओर से दाखिल याचिका खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने कहा कि रिकॉर्ड में घटना स्थल और यात्री के बयान के संबंध में विसंगति के कारण ‘वास्तविक यात्रा’ पर ‘गंभीर संदेह’ पैदा होता है, और चूंकि मूलभूत तथ्य ‘अपुष्ट’ रहे हैं, इसलिए दावे को ‘अवांछित घटना’ के दायरे में नहीं लाया जा सकता है।
अदालत ने 25 मार्च के आदेश में रेलवे दावा न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ यात्री की अपील को खारिज कर दी। न्यायाधिकरण ने 2018 में ‘चोट के लिए मुआवजे’ के दावे को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा कि न्यायाधिकरण के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है।
अपीलकर्ता ने दावा किया था कि वह मार्च 2015 में वैध द्वितीय श्रेणी का यात्रा टिकट लेकर सोनीपत रेलवे स्टेशन से झांसी जाने के लिए मालवा एक्सप्रेस में सवार हुआ था।
उसने दावा किया कि ट्रेन में भारी भीड़ के कारण, वह गलती से सोनीपत और नई दिल्ली रेलवे स्टेशनों के बीच नीचे गिर गया, जिसके परिणामस्वरूप उसे गंभीर चोटें आईं और कोहनी के आगे दोनों हाथ काटने पड़े।
अदालत ने फैसले में टिप्पणी की कि यद्यपि अपीलकर्ता ने दावा किया कि वह सदर बाजार के पास गिरा था, लोक नायक अस्पताल के रिकॉर्ड में घटना स्थल को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 10 के रूप में दर्ज किया गया है जबकि ट्रेन वहां से नहीं गुजरी थी।
भाषा धीरज नरेश
नरेश

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