अदालत ने जमानत याचिकाओं का विरोध करने के एनसीबी के तरीके पर जतायी निराशा

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अदालत ने जमानत याचिकाओं का विरोध करने के एनसीबी के तरीके पर जतायी निराशा

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  • Publish Date - August 1, 2026 / 03:00 PM IST,
    Updated On - August 1, 2026 / 03:00 PM IST

नयी दिल्ली, एक अगस्त (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने जमानत याचिका का विरोध करते समय आरोपी के खिलाफ मामले से जुड़े साक्ष्यों का उल्लेख नहीं कर पाने पर स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के रवैये पर निराशा व्यक्त की है।

आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश जितेंद्र प्रताप सिंह ने एनसीबी के क्षेत्रीय निदेशक को निर्देश दिया कि वह जमानत याचिका का प्रभावी ढंग से विरोध न कर पाने के संबंध में एजेंसी की ओर से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।

अदालत ने 30 जुलाई के आदेश में कहा कि न तो मूल जांच अधिकारी और न ही मामले की पैरवी कर रहे अधिकारी यह बता सके कि ऐसा कौन-सा साक्ष्य है, जो सीधे तौर पर याचिकाकर्ता या आरोपी को कथित अपराध से जोड़ता है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अत्यंत खेद के साथ यह अदालत जमानत याचिकाओं का विरोध करने के मामले में एजेंसी के कामकाज के तरीके पर अपनी निराशा व्यक्त कर रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अदालत में मामलों के बड़ी संख्या में लंबित होने के कारण सामान्यतः जमानत याचिकाओं पर लगभग 45 दिन बाद सुनवाई की तारीख दी जाती है। इसके बावजूद कई मामलों में अभियोजन पक्ष से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण अदालत को सुनवाई स्थगित करनी पड़ती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में निर्देश दिया जाता है कि इस आदेश की प्रति एनसीबी के क्षेत्रीय निदेशक के समक्ष रखी जाए और उनसे इस जमानत याचिका पर दाखिल जवाब के आलोक में स्पष्टीकरण मांगा जाए।’’

न्यायाधीश ने एनसीबी के क्षेत्रीय निदेशक को यह भी बताने का निर्देश दिया कि क्या इस मामले में एजेंसी द्वारा दाखिल जवाब वर्तमान जमानत याचिका का विरोध दर्ज कराने के लिए पर्याप्त है।

भाषा गोला रंजन

रंजन