अदालत ने हावड़ा के मंगलहाट के रेहड़ी-पटरीवालों को अंतरिम राहत देने से किया इनकार

अदालत ने हावड़ा के मंगलहाट के रेहड़ी-पटरीवालों को अंतरिम राहत देने से किया इनकार

अदालत ने हावड़ा के मंगलहाट के रेहड़ी-पटरीवालों को अंतरिम राहत देने से किया इनकार
Modified Date: July 9, 2026 / 02:00 pm IST
Published Date: July 9, 2026 2:00 pm IST

कोलकाता, नौ जुलाई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हावड़ा शहर के एक सदी पुराने मंगलहाट में रेहड़ी-पटरीवालों को पुलिस की उस कार्रवाई से कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, जिसका मकसद सड़क और फुटपाथ की जगह को खाली रखना है।

‘हावड़ा हॉकर्स समिति’ ने अपनी याचिका में पुलिस पर जरूरत से अधिक कार्रवाई करने का आरोप लगाया है तथा उच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह पुलिस को उन्हें हटाने और उनके कारोबार में दखल देने से रोकने का आदेश दे।

समिति के अनुरोध के बावजूद पुलिस कार्रवाई पर रोक का कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने बुधवार को कहा कि रेहड़ी -पटरी वालों की यह समिति सड़क और फुटपाथ रोककर सामान बेचकर अपनी आजीविका कमाने के अधिकार के बारे में अदालत को शुरुआती तौर पर संतुष्ट नहीं कर सकी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि हलफनामों के आदान-प्रदान के बाद इस मामले पर विचार करने की जरूरत है। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने प्रतिवादी प्रशासन को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के तर्क के विरोध में अगले दो हफ़्तों के भीतर अपने हलफनामे दाखिल करें।

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को उससे अगले हफ्ते में उसके जवाब में अपना हलफनामा दाखिल करने की छूट होगी।

याचिकाकर्ता के वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि हालांकि बाजार में कुछ पाबंदियां लगाई जा सकती हैं, लेकिन ‘रेहड़ी-पटरी बिक्री अधिनियम’ को देखते हुए रेहड़ी-पटरी वालों को पूरी तरह से हटाया नहीं जा सकता।

उन्होंने बताया कि हावड़ा शहर के मध्य जिले में सदी पुराना बाजार हफ्ते में दो बार सड़कों पर लगता है।

उन्होंने कहा कि फेरी लगाकर रोज़ी-रोटी कमाना एक बुनियादी अधिकार है। उन्होंने बताया कि हावड़ा नगर निगम के अधिकारियों ने फेरीवालों को हटाने के लिए कोई नोटिस नहीं दिया था।

राज्य की ओर से पेश वकील सूर्यनील दास ने कहा कि सड़कों को खुला रखना पुलिस की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इन रेहड़ी पटरीवालों के बाजार से रास्ते बाधित होते हैं और जाम लगता है।

भाषा

राजकुमार नरेश

नरेश


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