पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी, जांच संबंधी याचिका पर सुनवाई से अदालत का इनकार

पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी, जांच संबंधी याचिका पर सुनवाई से अदालत का इनकार

पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी, जांच संबंधी याचिका पर सुनवाई से अदालत का इनकार
Modified Date: September 21, 2026 / 03:06 pm IST
Published Date: September 21, 2026 3:06 pm IST

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आवास पर आग लगने के बाद कथित रूप से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और विशेष जांच दल (एसआईटी) या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई करने से सोमवार को इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति अमित बंसल ने याचिका को ‘‘बिना किसी ठोस सबूत के दोषारोपण की कवायद’’ करार देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय के पास कानून के तहत अन्य विकल्प उपलब्ध हैं।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मैं इस पर सुनवाई नहीं कर रहा हूं। यह बिना किसी ठोस सबूत के दोषारोपण की कवायद है। आपके पास करने के लिए कुछ बेहतर नहीं है?’’

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के इस मामले में याचिका दाखिल करने के कानूनी अधिकार पर सवाल उठाया और पूछा कि उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कराने के अनुरोध को लेकर अधीनस्थ अदालत का रुख क्यों नहीं किया।

याचिकाकर्ता ने कहा कि यह घटना ‘‘असाधारण’’ प्रकृति की है और अधीनस्थ अदालत ‘‘इस मामले के साथ न्याय नहीं कर सकती।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़ा मामला है। आपराधिक कानून की प्रक्रिया कोई भी शुरू करा सकता है। इस पर कोई रोक नहीं है।’’

अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के संकेत देने के बाद याचिकाकर्ता ने कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपायों पर विचार करने के लिए अपनी याचिका वापस ले ली।

याचिकाकर्ता ने इससे पहले इसी अनुरोध को लेकर उच्चतम न्यायालय का रुख किया था, लेकिन अगस्त में उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

लुटियंस दिल्ली स्थित वर्मा के आवास में 14 मार्च 2025 को होली की रात करीब 11 बजकर 35 मिनट पर आग लगने के बाद कथित रूप से बड़ी मात्रा में नकदी मिली थी। उस समय वर्मा दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे।

नकदी मिलने के मामले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था और इसके बाद वर्मा का तबादला उनके मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय कर दिया गया था।

महाभियोग की कार्यवाही का सामना कर रहे वर्मा ने इस साल नौ अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर इस्तीफा सौंपा था। उन्हें पद से हटाने के लिए लोकसभा द्वारा शुरू की गई कार्यवाही उनके इस्तीफे के बाद निष्प्रभावी हो गई थी। वर्मा पांच जनवरी 2031 को सेवानिवृत्त होने वाले थे।

भाषा

सिम्मी दिलीप

दिलीप


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