यूट्यूबर शंकर की जमानत शर्तों में हस्तक्षेप से न्यायालय का इनकार

यूट्यूबर शंकर की जमानत शर्तों में हस्तक्षेप से न्यायालय का इनकार

यूट्यूबर शंकर की जमानत शर्तों में हस्तक्षेप से न्यायालय का इनकार
Modified Date: January 30, 2026 / 05:01 pm IST
Published Date: January 30, 2026 5:01 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने यूट्यूबर एवं पत्रकार शंकर उर्फ ​​सावुक्कू शंकर पर मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई जमानत की शर्तों में हस्तक्षेप करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।

एक फिल्म निर्माता ने उनपर मारपीट करने और जबरन वसूली के आरोपों के तहत यह मामला दर्ज कराया है।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने शंकर की नई याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘‘यह व्यक्ति लगभग हर सप्ताह हमारे सामने आ जाता है। उसका लैपटॉप जब्त है, लेकिन वह उसे छुड़ाने के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन नहीं करता और सीधे शीर्ष अदालत आ जाता है। इसी तरह उसका फोन जब्त होने पर भी वह फोन वापस लेने के लिए सीधे शीर्ष अदालत का रुख करता है।’’

न्यायमूर्ति दत्ता ने शंकर के वकील बालाजी श्रीनिवासन से कहा कि आरोपी को पात्रता के आधार पर नहीं, बल्कि चिकित्सा कारणों से जमानत दी गई थी, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद उसने वीडियो और रील बनाना शुरू कर दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘जमानत पर रिहा होने के बाद आपने रील और वीडियो बनाना शुरू कर दिया तथा उन्हें यूट्यूब पर अपलोड कर दिया। जमानत मंजूर करने का उद्देश्य यह नहीं था। आप अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रहे हैं, यह उच्च न्यायालय का निष्कर्ष है। अब, आपकी जमानत रद्द नहीं की गई है, लेकिन उच्च न्यायालय ने शर्तें लगाई हैं तथा आपको लंबित मामलों के बारे में बात न करने के लिए कहा है, लेकिन आप अब भी ऐसा कर ही रहे हैं।’’

राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि पुलिस को जांच के लिए शंकर के मोबाइल की जरूरत थी, जो उन्होंने नहीं सौंपा और जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने उस फोन को दिखाते हुए एक वीडियो भी बनाया।

उन्होंने आगे कहा कि शंकर इलाज के लिए अस्पताल नहीं गए, जबकि इसी के लिए उन्हें अंतरिम जमानत दी गई थी।

न्यायमूर्ति शर्मा ने टिप्पणी की, ‘‘…क्योंकि वह रील बनाने में व्यस्त थे।’’

शंकर के वकील श्रीनिवासन ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को चिकित्सा कारणों से जमानत नहीं दी गई थी और उच्च न्यायालय ने जमानत देते समय शंकर को निशाना बनाने के लिए राज्य पुलिस की आलोचना की थी।

उन्होंने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय ने इस बात का भी संज्ञान लिया था कि जब शंकर ने बुखार की शिकायत की, तो चिकित्सक ने ईसीजी जांच की और हृदय की उनकी पुरानी समस्या को ध्यान में रखते हुए उन्हें सरकारी अस्पताल ‘रेफर’ कर दिया।

न्यायमूर्ति दत्ता ने श्रीनिवासन से कहा कि अगर वह (शंकर) इतने बीमार हैं तो उन्हें संयम बरतना चाहिए और यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करने से पहले ठीक हो जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि वह जमानत की शर्तों में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने शंकर की याचिका खारिज कर दी।

शीर्ष अदालत ने 20 जनवरी को यूट्यूबर की एक अन्य याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने चेन्नई में उनके कार्यालय पर प्रशासन द्वारा लगाया गया ताला खोलने और मारपीट एवं जबरन वसूली के एक मामले में जब्त किए गए उनके उपकरणों को वापस करने के निर्देश देने का अनुरोध किया था।

इसने मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती देने वाली शंकर की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था और उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट से संपर्क करने के लिए कहा था।

मद्रास उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष 26 दिसंबर को स्वास्थ्य कारणों के आधार पर शंकर को 17 आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत दे दी थी।

न्यायालय ने पाया था कि तमिलनाडु पुलिस द्वारा उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बार-बार अंकुश लगाना ‘‘कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग’’ माना जा सकता है।

शंकर को 13 दिसंबर को उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि उन्होंने एक फिल्म निर्माता से जबरन वसूली की थी।

भाषा सुरेश मनीषा

मनीषा


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