मानसिक रूप से निशक्त दत्तक पुत्र की अभिरक्षा सौंपने की याचिका पर अदालत ने कारा से मांगा जवाब
मानसिक रूप से निशक्त दत्तक पुत्र की अभिरक्षा सौंपने की याचिका पर अदालत ने कारा से मांगा जवाब
नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला की उस याचिका पर केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) से उसका रुख बताने को कहा है, जिसमें उसने अपने 14 वर्षीय दत्तक पुत्र की अभिरक्षा ‘‘सौंपने’’ का अनुरोध किया है। बाद में पता चला कि किशोर मानसिक रूप से निशक्त है।
महिला ने आरोप लगाया कि उसने अपने पति के साथ 2018 में कारा के माध्यम से इस बच्चे को गोद लिया था। उसने दावा किया कि बच्चे ने आक्रामकता और चोरी सहित अनुचित व्यवहार किया और उसे कई स्कूलों से निकाल दिया गया। महिला ने कहा कि इस स्थिति में उसके लिए उसकी देखभाल करना संभव नहीं रह गया है।
न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने 17 सितंबर को केंद्र सरकार, कारा, संबंधित बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) और किशोर को नोटिस जारी किए और याचिका पर उनके जवाब मांगे।
उन्होंने मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर नियत की।
याचिकाकर्ता ने बताया कि 2021 में उसके पति की मृत्यु हो गई तथा अब वह अपनी बुजुर्ग मां और बहन के साथ रहती है। उसने आरोप लगाया कि किशोर के आक्रामक और ‘‘अत्यधिक कामुक व्यवहार’’ के कारण वे ‘‘लगातार इस डर’’ में रहती हैं कि वह उनके साथ अनुचित व्यवहार कर सकता है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि जब किशोर को पैसे नहीं दिए जाते थे या वह याचिकाकर्ता के पैसे अथवा कीमती सामान चुरा नहीं पाता था, तो वह हिंसक हो जाता था। इसमें दावा किया गया है कि उसने एक अन्य महिला के साथ भी अनुचित व्यवहार किया था और इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन बाद में याचिकाकर्ता के अनुरोध पर शिकायत बंद कर दी गई।
दत्तक मां ने अदालत से किशोर की अभिरक्षा कारा या किसी उपयुक्त संगठन को सौंपने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कारा और बाल कल्याण समिति को किशोर का चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया है।
भाषा गोला मनीषा
मनीषा

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