अदालत ने संभल में कब्रिस्तान की जमीन को लेकर जारी नोटिस पर रोक लगायी

अदालत ने संभल में कब्रिस्तान की जमीन को लेकर जारी नोटिस पर रोक लगायी

अदालत ने संभल में कब्रिस्तान की जमीन को लेकर जारी नोटिस पर रोक लगायी
Modified Date: March 28, 2026 / 11:05 pm IST
Published Date: March 28, 2026 11:05 pm IST

प्रयागराज, 28 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल जिला प्रशासन द्वारा एक जनवरी 2026 को जारी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगा दी है। नोटिस में याचिकाकर्ता अली अशरफ को विवादित जमीन पर उसके कब्जे के संबंध में 15 दिनों के भीतर कारण बताने और अपने मामले के समर्थन में साक्ष्य दाखिल करने को कहा गया था।

हालांकि, अली अशरफ के मुताबिक यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में कब्रिस्तान के तौर पर दर्ज है और यह संभल की शाही जामा मस्जिद से संबद्ध है। इसके अलावा, लंबे समय से इस जमीन पर याचिकाकर्ता का कब्जा है जहां उसका एक रिहायशी मकान भी है।

अली अशरफ द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने 25 मार्च के अपने आदेश में दोनों पक्षों को इस दौरान यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया और साथ ही राज्य सरकार को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख छह मई निर्धारित की।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता का विवादित जमीन पर कब्जा है और वहां उसका एक रिहायशी मकान भी मौजूद है। इस विवादित भूमि का 200 साल से अधिक समय से आबादी के तौर पर उपयोग किया गया है और इस दौरान जमीन के निवासियों द्वारा कई सौदे किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता का इस विवादित भूमि पर कब्जा है और प्रशासन की तरफ से महज नोटिस देकर उसे जमीन से बेदखल नहीं किया जा सकता।

वहीं, दूसरी ओर राज्य सरकार के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल नोटिस को चुनौती दी है और इस प्रकार से यह रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। नोटिस में कहा गया है कि याचिकाकर्ता अपनी आपत्तियां और अपने मामले के समर्थन में साक्ष्य दाखिल कर सकता है।

राज्य सरकार के वकील ने यह दलील भी दी कि राज्य अपनी प्रशासनिक शक्तियों का उपयोग कर सार्वजनिक भूमि से अनाधिकृत कब्जा खाली करा सकती है।

भाषा सं राजेंद्र

गोला

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