अदालतें धार्मिक मान्यताओं, संप्रदायों के मामलों में निर्णय नहीं दे सकतीं: टीडीबी ने न्यायालय में कहा

अदालतें धार्मिक मान्यताओं, संप्रदायों के मामलों में निर्णय नहीं दे सकतीं: टीडीबी ने न्यायालय में कहा

अदालतें धार्मिक मान्यताओं, संप्रदायों के मामलों में निर्णय नहीं दे सकतीं: टीडीबी ने न्यायालय में कहा
Modified Date: April 15, 2026 / 03:01 pm IST
Published Date: April 15, 2026 3:01 pm IST

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) केरल के ऐतिहासिक शबरिमला मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि धर्म उन मान्यताओं और परंपराओं का समूह है, जिसका पालन समान पहचान वाला समुदाय करता है और अदालत उस मान्यता पर फैसला नहीं सुना सकती।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने बताया कि समुदाय की मान्यताओं और परंपराओं का मूल्यांकन समुदाय की अपनी आस्था के आधार पर किया जाना चाहिए और अदालत उन मान्यताओं को स्वीकार करने के लिए बाध्य है।

टीडीबी एक वैधानिक स्वायत्त निकाय है और दक्षिण भारत में 1,000 से अधिक मंदिरों का प्रबंधन करता है।

टीडीबी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘‘धर्म उन मान्यताओं और परंपराओं का समूह है, जिसका अनुसरण व्यापक रूप से समान पहचान वाले किसी समूह/पंथ/सम्प्रदाय द्वारा किया जाता है। हालांकि, अनुच्छेद 25 स्पष्ट रूप से किसी व्यक्ति को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है, लेकिन ऐसे व्यक्तिगत अधिकारों को इस सीमा तक विस्तारित नहीं किया जा सकता कि वे उसी धर्म या सम्प्रदाय के अन्य सभी अनुयायियों के व्यक्तिगत अधिकारों का अतिक्रमण करें।’’

पीठ में न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना, न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची भी शामिल हैं।

सिंघवी ने पीठ को बताया कि विशिष्ट संवैधानिक मूल पाठ में कुछ जोड़ना, संशोधित करना या हटाना अस्वीकार्य है तथा इस प्रकार कुछ निर्णयों द्वारा लगाई गई ‘अनिवार्यता’ का अतिरिक्त अपवाद पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

सुनवाई के चौथे दिन, सिंघवी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अंतरात्मा की स्वतंत्रता और लोक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य और संविधान के भाग 3 के अन्य प्रावधानों के अधीन धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है।

मामले की सुनवाई जारी है।

नौ न्यायाधीशों की यह पीठ धार्मिक स्थलों, जिनमें शबरिमला मंदिर भी शामिल है, में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। साथ ही, विभिन्न धर्मों द्वारा अपनाई जाने वाली धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और विस्तार पर भी विचार कर रही है।

भाषा शोभना सुभाष

सुभाष


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