माकपा ने देशाभिमानी में अच्युतानंदन की स्मृति में लिखे गए लेख पर रोक की खबरें खारिज कीं

माकपा ने देशाभिमानी में अच्युतानंदन की स्मृति में लिखे गए लेख पर रोक की खबरें खारिज कीं

माकपा ने देशाभिमानी में अच्युतानंदन की स्मृति में लिखे गए लेख पर रोक की खबरें खारिज कीं
Modified Date: July 19, 2026 / 07:52 pm IST
Published Date: July 19, 2026 7:52 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 19 जुलाई (भाषा) केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रविवार को मीडिया में आईं उन खबरों को खारिज कर दिया कि उसके मुखपत्र ‘देशाभिमानी’ ने जानबूझकर अपने साप्ताहिक विशेषांक का प्रकाशन रोक दिया था, ताकि उसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वी. एस. अच्युतानंदन पर लिखा लेख प्रकाशित न किया जाए।

पार्टी ने कहा कि देरी केवल “तकनीकी कारणों” से हुई थी।

मीडिया में आईं कुछ खबरों में कहा गया था कि रविवार का साप्ताहिक विशेषांक इसलिए प्रकाशित नहीं किया गया, ताकि 21 जुलाई को अच्युतानंदन की पहली पुण्यतिथि से पहले उनकी याद में लिखा गया लेख उसमें शामिल न हो।

इस लेख का शीर्षक “मुझंगिन्निप्पोलुम आ कदलिरंबम” (उस समुद्र की गूंज अब भी सुनाई देती है) था। इसे अच्युतानंदन के पूर्व सचिव और जीवनी लेखक के. वी. सुधाकरन ने लिखा था।

कहा जा रहा था कि यह लेख विशेषांक का मुख्य लेख होने वाला था। रविवार के देशाभिमानी अंक में एक संपादकीय नोट में कहा गया कि साप्ताहिक विशेषांक “तकनीकी कारणों” से प्रकाशित नहीं किया जा सका।

इसके बाद मीडिया में आईं कुछ खबरों में दावा किया गया कि विशेषांक के अंतिम पृष्ठ पर छपने वाले एक अन्य लेख के शीर्षक को लेकर हुए विवाद के बाद इसे रोक दिया गया था।

इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया मंचों पर भी कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। विवाद बढ़ने के बाद देशाभिमानी के स्थानीय संपादक एम. स्वराज ने एक स्पष्टीकरण जारी कर इन खबरों को “बेबुनियाद” बताया।

उन्होंने कहा कि अच्युतानंदन पर लिखा गया स्मृति लेख हटाया नहीं गया है और साप्ताहिक विशेषांक को केवल छपाई से जुड़ी “तकनीकी समस्याओं” के कारण टाला गया था।

स्वराज ने मीडिया से अपील की कि वह दिवंगत माकपा नेता को “निराधार विवाद” में न घसीटें।

उन्होंने कहा कि साप्ताहिक विशेषांक अब सोमवार के अखबार के साथ वितरित किया जाएगा।

स्वराज के अनुसार, छपाई से जुड़ी तकनीकी समस्याएं अब हल हो गई हैं और अच्युतानंदन पर लिखे स्मृति लेख समेत पूरा विशेषांक सोमवार के संस्करण के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

भाषा जोहेब प्रशांत

प्रशांत


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