सीआरपीएफ पहली महिला बटालियन के गठन की 40वीं वर्षगांठ मनाएगी

सीआरपीएफ पहली महिला बटालियन के गठन की 40वीं वर्षगांठ मनाएगी

सीआरपीएफ पहली महिला बटालियन के गठन की 40वीं वर्षगांठ मनाएगी
Modified Date: September 22, 2026 / 01:36 pm IST
Published Date: September 22, 2026 1:36 pm IST

नयी दिल्ली , 22 सितंबर (भाषा) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) अपनी पहली पूर्ण महिला बटालियन के गठन की 40वीं वर्षगांठ पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगा। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

पहली ऐसी इकाई का गठन छह फरवरी 1986 को किया गया था। बल में अब छह पूर्ण महिला बटालियन हैं।

अधिकारियों ने बताया कि यह कार्यक्रम 25 सितंबर को यहां 88वीं ‘महिला बटालियन’ के परिसर में आयोजित किया जाएगा, जहां सीआरपीएफ के महानिदेशक जी. पी. सिंह और बल के परिवार कल्याण संघ की अध्यक्ष उनकी पत्नी, सेवारत और सेवानिवृत्त महिला कर्मियों को सम्मानित करेंगे।

सीआरपीएफ की विशेष इकाइयों में भी महिला कर्मी हैं, जिनमें त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) और कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन (कोबरा) शामिल हैं। इसके अलावा बल की अन्य नियमित इकाइयों में भी महिला कर्मी तैनात हैं।

सीआरपीएफ में विभिन्न पदों पर 10,000 से अधिक महिला कर्मी हैं।

बल की महिला कर्मियों को वीरता पुरस्कार भी मिले हैं। इनमें कांस्टेबल कमलेश कुमारी शामिल हैं, जिन्हें 2001 में संसद पर हुए आतंकवादी हमले को नाकाम करने में भूमिका निभाने के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। कांस्टेबल विमला देवी को सेना पदक से सम्मानित किया गया था, जबकि लांस नायक राजवंती देवी को 1988 में श्रीलंका में इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (आईपीकेएफ) के साथ ‘‘महत्वपूर्ण’’ अभियानगत भूमिका निभाने के लिए थल सेना प्रमुख प्रशंसा पत्र दिया गया था।

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, कांस्टेबल बिंदु कुमरे को 2001 में श्रीनगर हवाई अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान ‘‘उत्कृष्ट’’ बहादुरी दिखाने के लिए वीरता पदक से सम्मानित किया गया था।

करीब 3.25 लाख कर्मियों वाला सीआरपीएफ देश का प्रमुख आंतरिक सुरक्षा बल है। इसे मुख्य रूप से नक्सल रोधी अभियानों, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियानों और पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद रोधी अभियानों सहित आंतरिक सुरक्षा संबंधी कर्तव्यों के लिए तैनात किया जाता है।

भाषा अमित

अमित


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