संवाद, विश्वास और सतत विकास की शक्तिशाली ताकत है संस्कृति : एससीओ बैठक में भारत
संवाद, विश्वास और सतत विकास की शक्तिशाली ताकत है संस्कृति : एससीओ बैठक में भारत
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) भारत ने रविवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की एक महत्वपूर्ण बैठक में कहा कि संवाद, विश्वास और सतत विकास के लिए संस्कृति एक शक्तिशाली माध्यम है।
भारत ने “साझा सभ्यतागत विरासत” के संरक्षण और संगठन के सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के संस्कृति मंत्रियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
शेखावत ने अपने संबोधन में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सभ्यतागत भावना का उल्लेख किया और संस्कृति के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।
शेखावत ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “इस बात पर जोर दिया कि संवाद, विश्वास और सतत विकास के लिए संस्कृति एक शक्तिशाली शक्ति है। साझा सभ्यतागत विरासत के संरक्षण, एससीओ सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की शाश्वत भावना को आगे बढ़ाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।”
मंत्री शनिवार को बिश्केक पहुंचे थे।
एससीओ एक प्रभावशाली आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जो दुनिया के सबसे बड़े अंतर-क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक बन चुका है।
इसकी स्थापना 2001 में शंघाई में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में रूस, चीन, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने की थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके स्थायी सदस्य बने। इसके अन्य सदस्यों में ईरान और बेलारूस शामिल हैं।
इससे पहले अप्रैल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बिश्केक में आयोजित एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था।
भाषा अमित प्रशांत
प्रशांत

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