हिरासत में मौत: न्यायालय ने सीबीआई जांच का दिया आदेश, 25 लाख रु मुआवजा देने का निर्देश

हिरासत में मौत: न्यायालय ने सीबीआई जांच का दिया आदेश, 25 लाख रु मुआवजा देने का निर्देश

हिरासत में मौत: न्यायालय ने सीबीआई जांच का दिया आदेश, 25 लाख रु मुआवजा देने का निर्देश
Modified Date: August 12, 2026 / 08:26 pm IST
Published Date: August 12, 2026 8:26 pm IST

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 2024 में छत्तीसगढ़ में 34 वर्षीय एक व्यक्ति की हिरासत में मौत के कारणों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने का बुधवार को आदेश दिया और राज्य सरकार को मृतक की पत्नी तथा बच्चों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने यह भी कहा कि सीबीआई निदेशक यह सुनिश्चित करें कि श्रवण सूर्यवंशी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमित आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

राज्य के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ न तो पुलिस कार्रवाई और न ही विभागीय कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि न्यायिक जांच रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराई गई थी, यह स्पष्टीकरण ‘‘मामले को दबाने और अदालत की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश है।’’

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा, ‘‘मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हम पूरी तरह संतुष्ट हैं कि न्याय के हित में श्रवण की हिरासत में मौत की परिस्थितियों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी जानी चाहिए। जांच पूरी होने के बाद हिरासत में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई और मुकदमा चलाया जाना चाहिए।’’

पीठ ने यह आदेश सूर्यवंशी की पत्नी और बच्चों द्वारा दायर याचिका पर दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अक्टूबर 2024 के फैसले को चुनौती दी थी।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि सूर्यवंशी को हिरासत में हिंसा का सामना करना पड़ा था और इसी के परिणामस्वरूप उनकी मौत हुई।

उच्च न्यायालय ने यह आदेश सूर्यवंशी की पत्नी और बच्चों की उस याचिका पर दिया था, जिसमें 50 लाख रुपये के मुआवजे और हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का अनुरोध किया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को केवल एक लाख रुपये का मामूली मुआवजा दिया और हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

पीठ ने कहा कि सूर्यवंशी को छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 के प्रावधानों के तहत बिलासपुर में दर्ज एक प्राथमिकी के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।

प्राथमिकी के अनुसार, उसके पास छह लीटर कच्ची ‘महुआ’ शराब वाली तीन बोतलें मिली थीं, जिनकी कीमत 1,200 रुपये बताई गई थी।

सूर्यवंशी को बिलासपुर केंद्रीय जेल में रखा गया था। स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उसे 21 जनवरी 2024 को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान 22 जनवरी 2024 को उसकी मौत हो गई।

न्यायालय ने कहा कि चूंकि मृत्यु के समय सूर्यवंशी हिरासत में था इसलिए जेल अधीक्षक ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखकर हिरासत में मौत की न्यायिक जांच कराने का अनुरोध किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जांच पूरी कर 22 जुलाई 2024 को रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया कि मौत संभवतः सिर में लगी चोट से उत्पन्न जटिलताओं के कारण हुई।

न्यायालय ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट उच्च न्यायालय के समक्ष पेश नहीं की गई और संबंधित सामग्री भी शीर्ष अदालत के निर्देश के बाद ही रिकॉर्ड में लाई गई। इससे राज्य के अधिकारियों द्वारा अपनाए गए ‘‘टालमटोल वाले रवैये’’ का भी पता चलता है।

पीठ ने कहा कि जांच सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए और इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

न्यायालय ने अंतरिम उपाय के तौर पर राज्य सरकार को याचिकाकर्ताओं को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।

भाषा गोला नरेश

नरेश


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