साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले में अंतरित 85 लाख रुपये से अधिक की रकम बचाई

साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले में अंतरित 85 लाख रुपये से अधिक की रकम बचाई

साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले में अंतरित 85 लाख रुपये से अधिक की रकम बचाई
Modified Date: August 26, 2026 / 08:30 pm IST
Published Date: August 26, 2026 8:30 pm IST

हैदराबाद, 26 अगस्त (भाषा) तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले के तहत 85 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी द्वारा अंतरित की गई 85.20 लाख रुपये की रकम बचा ली। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

ब्यूरो निदेशक शिखा गोयल ने एक विज्ञप्ति में बताया कि 21 अगस्त को शहर के 85 वर्षीय व्यक्ति से एक व्यक्ति ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) का अधिकारी बनकर संपर्क किया।

गोयल ने बताया कि जालसाज ने झूठा आरोप लगाया कि बुजुर्ग के आधार विवरण का दुरुपयोग कर कर्नाटक व केरलम में बैंक खाते खोले गए हैं और करीब 2.50 करोड़ रुपये के फर्जी लेनदेन किए गए।

उन्होंने बताया कि फोन करने वाला व्यक्ति तेलुगु में बात कर रहा था और वीडियो कॉल पर पुलिस/एनआईए जैसी वर्दी पहने दिखाई दे रहा था।

अधिकारी ने बताया कि जालसाज ने पीड़ित को गंभीर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी और किसी से बात या संपर्क नहीं करने तथा मामले को पूरी तरह गुप्त रखने का निर्देश दिया।

गोयल ने बताया कि जालसाज ने पीड़ित को यह भी धमकी दी कि अगर उसने इस मामले की जानकारी किसी को दी तो स्थानीय पुलिसकर्मी उसके घर आएंगे, जिससे उसे सामाजिक रूप से शर्मिंदगी और आगे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने बताया, “फोन करने वाले के झांसे में आकर पीड़ित ने उसके बताए बैंक खाते में 85,20,000 रुपये अंतरित कर दिए। उसे भरोसा दिलाया गया था कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह रकम वापस कर दी जाएगी। बाद में जब ठग ने 42 लाख रुपये और मांगे तो पीड़ित को शक हुआ। उसने अपने बैंक से संपर्क किया, जहां उसे बताया गया कि वह साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो सकता है।”

अधिकारी ने बताया कि पीड़ित ने तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायत दर्ज कराई।

गोयल ने बताया कि ब्यूरो के अधिकारियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए रकम के लेनदेन का पता लगाया और कोयंबटूर शाखा के एक निजी बैंक में मौजूद संदिग्ध के खाते के लेन-देन पर रोक लगा दी, जिससे पीड़ित द्वारा अंतरित की गई पूरी 85.20 लाख रुपये की रकम सुरक्षित कर ली गई।

भाषा जितेंद्र अविनाश

अविनाश


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