‘हिरासत में मौत’ मामला: मां का दावा, पुलिसकर्मी ने बेटे की फोटो के लिए माला तैयार रखने को कहा था

‘हिरासत में मौत’ मामला: मां का दावा, पुलिसकर्मी ने बेटे की फोटो के लिए माला तैयार रखने को कहा था

‘हिरासत में मौत’ मामला: मां का दावा, पुलिसकर्मी ने बेटे की फोटो के लिए माला तैयार रखने को कहा था
Modified Date: June 24, 2026 / 09:32 pm IST
Published Date: June 24, 2026 9:32 pm IST

विजयवाड़ा, 23 जून (भाषा) “तुम क्यों आई हो? मैं तुम्हारे बेटे को मार डालूंगा। उसकी फोटो के लिए माला तैयार रखो।” आंध्र प्रदेश के सनसनीखेज गडे साईं कृष्णा मामले में गिरफ्तार पुलिस निरीक्षक ने पीड़ित की मां से कथित तौर पर यह बात कही थी।

आंध्र प्रदेश में साईं कृष्णा के “गायब” होने की घटना पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में है। साईं कृष्णा की मां गडे विजय लक्ष्मी ने विजयवाड़ा के कृष्णा लंका थाने के निलंबित पुलिस निरीक्षक एसएसवीवी नागराजू पर अपने बेटे को यातनाएं देकर मार डालने और फिर परिजन को बताए बिना ही उसका अंतिम संस्कार करने का आरोप लगाया है।

विजय लक्ष्मी ने अपने बेटे के “गायब” होने के सिलसिले में नागराजू के खिलाफ 19 जून को दर्ज कराई गई शिकायत में कहा, “जब मैं साईं कृष्णा के बारे में पता करने के लिए थाने पहुंची, तो उसने (नागराजू) मुझसे कहा, तुम क्यों आई हो? मैं तुम्हारे बेटे को मार डालूंगा। उसकी फोटो के लिए माला तैयार रखो।”

साईं कृष्णा मामले की पड़ताल के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने नागराजू को बुधवार को विजयवाड़ा की एक अदालत में पेश किया, जिसने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

अदालत में दायर रिमांड रिपोर्ट में एसआईटी ने कहा कि साईं कृष्णा का मामला कथित तौर पर अवैध हिरासत, गलत तरीके से कैद रखने, एक व्यक्ति की हत्या, जान-बूझकर सबूत मिटाने और झूठी जानकारी देने से जुड़ा हुआ है।

उसने कहा कि एसआईटी की जांच से प्रथम दृष्टया यह निष्कर्ष निकलता है कि साईं कृष्णा को पुलिस हिरासत में जानलेवा चोटें आईं और नागराजू की हिरासत में उसकी मौत हो गई।

रिमांड रिपोर्ट में कहा गया है कि एसआईटी की अब तक की जांच से ऐसे अहम तथ्य और हालात सामने आए हैं, जो “प्रथम दृष्टया अपराध में नागराजू की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।”

पुलिस के मुताबिक, साईं कृष्णा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था और उसे मई के पहले हफ्ते में मरकापुरम से कृष्णा लंका थाने लाया गया था।

पुलिस के अनुसार, छह मई की सुबह कॉन्स्टेबल तुलम हिमजा ने साईं कृष्णा की हिरासत और उसका मोबाइल फोन नागराजू को सौंप दिया।

रिमांड रिपोर्ट में कहा गया है, “साईं कृष्णा को बिना किसी गैरजरूरी देरी के और कानूनी रूप से निर्धारित समयसीमा के भीतर संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना जरूरी था। हालांकि, उसे किसी भी मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया। न ही उसे पेश न किए जाने का कोई कानूनी कारण बताया गया।”

साईं कृष्णा को हिरासत में लिए जाने की खबर मिलने पर उसकी मां थाने पहुंची। उसने बेटे को “लॉक-अप में गंभीर चोटों के साथ” पाया।

रिमांड रिपोर्ट के अनुसार, जब विजय लक्ष्मी ने नागराजू से अपने बेटे को रिहा करने का आग्रह किया, तो उसने महिला को कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

रिमांड रिपोर्ट में कहा गया है कि बाद में विजय लक्ष्मी ने अपनी वकील बहन को घटना की जानकारी दी, जो कुछ और वकीलों को साथ लेकर थाने पहुंची, लेकिन आरोप है कि पुलिसकर्मी ने इन लोगों को दुत्कारा, उनके साथ बदसलूकी की और उन्हें धमकाया।

रिमांड रिपोर्ट के मुताबिक, विजय लक्ष्मी ने बताया कि उसने “अपने बेटे को पुलिस थाने में देखा और उसके रोने की आवाज भी सुनी; उसने उसे बेहोशी की हालत में पाया और उसके पैर बंधे हुए भी देखे।”

इसमें कहा गया है, “विजय लक्ष्मी को यह भी पता चला कि थाने में आरोपी ने पीड़ित के साथ बेरहमी से मारपीट की थी।”

रिमांड रिपोर्ट के अनुसार, विजय लक्ष्मी ने अपने बेटे को बचाने के लिए उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की, लेकिन पुलिस ने अदालत को बताया कि साईं कृष्णा के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

रिमांड रिपोर्ट के मुताबिक, नागराजू ने उच्च न्यायालय से कहा कि साईं कृष्णा का “पता लगाने” के लिए प्रयास जारी हैं।

इसमें कहा गया है कि नागराजू ने अदालत को यह नहीं बताया कि विजयवाड़ा टास्क फोर्स पुलिस ने साईं कृष्णा को पहले ही मरकापुरम से पकड़ लिया था और उसके (नागराजू) लिखित अनुरोध पर पीड़ित को कृष्णा लंका थाने लाया गया था।

रिमांड रिपोर्ट में कहा गया है, “यह आचरण प्रथम दृष्टया पीड़ित की हिरासत से जुड़े अहम तथ्यों को जानबूझकर छिपाने की कोशिश की ओर इशारा करता है।”

इसमें कहा गया है कि जांच में यह भी सामने आया कि कृष्णा लंका थाने के एक मई से एक जून तक के सीसीटीवी फुटेज गायब हैं, जहां साईं कृष्णा की हिरासत में मौत होने का संदेह है।

एसआईटी ने कहा कि घटनाओं की पूरी कड़ी का पता लगाने, मृतक के शव को खोजने, इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने (अगर कोई हो) और अपराध से जुड़े और सबूत बरामद करने के लिए नागराजू से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

भाषा पारुल माधव

माधव


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