दशकों पुराना गोरखा मुद्दा पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के छह महीने के भीतर सुलझाएंगे : शाह

दशकों पुराना गोरखा मुद्दा पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के छह महीने के भीतर सुलझाएंगे : शाह

दशकों पुराना गोरखा मुद्दा पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के छह महीने के भीतर सुलझाएंगे : शाह
Modified Date: April 21, 2026 / 03:17 pm IST
Published Date: April 21, 2026 3:17 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

कुर्सियांग (पश्चिम बंगाल), 21 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रूप से अहम पहाड़ी क्षेत्रों के मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश करते हुए मंगलवार को वादा किया कि यदि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनती है तो दशकों पुराने गोरखा मुद्दे का समाधान छह महीने के भीतर कर दिया जाएगा।

शाह ने कहा कि भाजपा के अलावा कोई अन्य दल गोरखाओं की समस्या का स्वीकार्य समाधान नहीं निकाल सकता।

उन्होंने दार्जिलिंग जिले के कुर्सियांग में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा गोरखाओं की चिंताओं एवं आकांक्षाओं को समझती है और वह उनकी शर्तों के अनुसार समाधान खोजने की दिशा में काम करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के छह महीने के भीतर हर गोरखा के चेहरे पर मुस्कान होगी। हम गोरखा मुद्दे का ऐसा समाधान निकालेंगे जिससे गोरखा शांति से रह सकें।’’

गोरखा मुद्दा उत्तर बंगाल के गोरखा बहुल पहाड़ी जिलों में अलग राज्य की करीब एक सदी पुरानी मांग से जुड़ा है, हालांकि शाह ने अपने भाषण में ‘गोरखालैंड’ या ‘राज्य का दर्जा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया।

शाह ने इसके बजाय, पहाड़ी क्षेत्र के प्रश्न के ‘‘स्थायी राजनीतिक समाधान’’ के भाजपा के पुराने वादे को दोहराते हुए कहा कि इस मुद्दे का समाधान गोरखाओं की आकांक्षाओं के अनुरूप किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज आपसे यह वादा करके जा रहा हूं कि जैसे ही भाजपा की सरकार बनेगी, दशकों पुराने गोरखा मुद्दे का समाधान गोरखाओं की शर्तों के अनुसार किया जाएगा।’’

भाजपा 2009 से दार्जिलिंग लोकसभा सीट पर हर चुनाव जीतती रही है। पार्टी अलग राज्य को लेकर प्रतिबद्धता जताए बिना पहाड़ी क्षेत्र के मुद्दे का स्थायी राजनीतिक समाधान करने का वादा लगातार करती रही है।

गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर इस मुद्दे के समाधान के प्रयासों में शामिल होने से इनकार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री बनने के बाद इस मामले में तीन बैठक बुलाई थीं।

शाह ने कहा, ‘‘मैंने गृह मंत्री बनने के बाद गोरखा मुद्दे को सुलझाने के लिए तीन बड़ी बैठक बुलाईं लेकिन ममता दीदी की ओर से एक बार भी कोई प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हुआ।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ममता दीदी, गोरखा मुद्दे के समाधान के लिए हम आप पर निर्भर नहीं हैं। हमने एक वार्ताकार नियुक्त किया है, जो यहां के गोरखा संगठनों और पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों से बात कर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।’’

शाह ने दावा किया कि पहाड़ी क्षेत्र के लोगों की चिंताओं को केवल भाजपा ही समझती है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम आपको और आपकी समस्याओं को समझते हैं। भाजपा के अलावा कोई और दल गोरखा मुद्दे का समाधान नहीं कर सकता।’’

गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के साथ दशकों तक विश्वासघात किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस और तृणमूल ने केवल दार्जिलिंग के साथ ही नहीं, बल्कि हमारे देशभक्त गोरखा भाइयों के साथ भी अन्याय किया है।’’

शाह ने गोरखा मुद्दे से आगे बढ़कर भाजपा के चुनावी अभियान को विस्तार देने की कोशिश की और इस चुनाव को उत्तर बंगाल एवं पहाड़ी क्षेत्रों को ‘‘तृणमूल शासन के तहत वर्षों की उपेक्षा और अन्याय’’ से मुक्त कराने की लड़ाई के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह चुनाव पूरे पश्चिम बंगाल को तृणमूल के अपराधों से मुक्त कराने का चुनाव है। एक तरह से यह उत्तर बंगाल और दार्जिलिंग में दशकों से हो रहे अन्याय से मुक्ति का चुनाव है।’’

शाह ने संदेशखाली विवाद का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘पूरा पश्चिम बंगाल तय कर चुका है कि अब दीदी को जाना होगा। यह चुनाव हमारी बहनों की पूरे राज्य में सुरक्षा का चुनाव है। संदेशखाली की घटना ने राज्य को शर्मसार किया है।’’

भाजपा नेता ने अपने संबोधन में कहा कि दार्जिलिंग ने बार-बार भाजपा का समर्थन किया है, लेकिन इस बार पार्टी को पश्चिम बंगाल के बाकी हिस्सों से भी समर्थन चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘तीन चुनावों से दार्जिलिंग भाजपा को वोट देता आया है, लेकिन पश्चिम बंगाल के बाकी हिस्सों से उतना समर्थन नहीं मिला। इस बार पूरा पश्चिम बंगाल तय कर चुका है कि दीदी को हटाने का समय आ गया है।’’

शाह ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गोरखाओं के नाम मतदाता सूची से कथित रूप से हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने कहा, ‘‘एसआईआर के दौरान कुछ गोरखाओं के नाम हटा दिए गए थे। पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद ये सभी नाम फिर से मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।’’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गोरखा कार्यकर्ताओं के खिलाफ सैकड़ों झूठे मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने वादा किया कि भाजपा की सरकार बनने पर इन्हें वापस ले लिया जाएगा।

शाह ने कहा, ‘‘हमारे गोरखा भाई-बहनों के खिलाफ सैकड़ों झूठे मामले दर्ज किए गए हैं। चार मई को नतीजे आएंगे और पांच मई को भाजपा की सरकार बनेगी। पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार गोरखा भाई-बहनों के खिलाफ दर्ज सभी मामले 31 जुलाई से पहले वापस ले लेगी।’’

गृह मंत्री ने आदिवासियों के लिए बजटीय प्रावधान को लेकर भी ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा, ‘‘आदिवासी विकास, पहाड़ और उत्तर बंगाल के लिए ममता सरकार का कुल बजट 2,000 करोड़ रुपये है लेकिन मुसलमानों और मदरसों के लिए ममता सरकार का बजट 5,800 करोड़ रुपये है। यह अन्याय अधिक दिन तक नहीं चलेगा।’’

गोरखालैंड और दार्जिलिंग पहाड़ियों के लिए अधिक राजनीतिक स्वायत्तता की मांग उत्तर बंगाल के सबसे पुराने भावनात्मक राजनीतिक मुद्दों में से एक रही है, जिसने अक्सर इस क्षेत्र के चुनावी नतीजों को प्रभावित किया है।

भाषा सिम्मी मनीषा

मनीषा


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