तृणमूल के चुनाव चिह्न पर फैसला जानबूझकर टाला गया: कांग्रेस

तृणमूल के चुनाव चिह्न पर फैसला जानबूझकर टाला गया: कांग्रेस

तृणमूल के चुनाव चिह्न पर फैसला जानबूझकर टाला गया: कांग्रेस
Modified Date: September 18, 2026 / 02:57 pm IST
Published Date: September 18, 2026 2:57 pm IST

कोलकाता, 18 सितंबर (भाषा) कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वी गुटों को पार्टी का नाम और उसके ‘पुष्प एवं तृण’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोकने के फैसले की शुक्रवार को आलोचना की और आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने आगामी उपचुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने तक इस मामले में जानबूझकर फैसला टाला है।

सरकार ने एक बयान में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न को लेकर विवाद नया नहीं है और निर्वाचन आयोग को इस मामले का जल्द समाधान करना चाहिए था।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमें यह देखकर हैरानी हुई कि निर्वाचन आयोग ने इस मामले में जानबूझकर देरी की और रेजीनगर एवं नंदीग्राम उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच की प्रक्रिया समाप्त होने के दिन ही अपना फैसला सुनाते हुए चुनाव चिह्न पर रोक लगा दी। इससे फैसले के पीछे के उद्देश्य को लेकर गंभीर संदेह पैदा होता है।’’

सरकार ने कहा कि संविधान में बहुदलीय संसदीय लोकतंत्र की परिकल्पना की गई है जो ‘‘लोकतंत्र की खूबसूरती’’ है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था देश में बहुलतावाद की मूल भावना को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने हमेशा इस बहुलवाद में विश्वास किया है।’’

सरकार ने महाराष्ट्र में शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर हुए विवाद का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न संबंधी विवाद में भी इसी तरह की भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक प्रतिस्पर्धा एवं वैचारिक लड़ाई होती रहेगी और संसदीय लोकतंत्र में यही वांछनीय है। अगर किसी को हराना है तो हम संसदीय लोकतंत्र के जरिये हराएंगे। अगर किसी को राजनीतिक रूप से खत्म करना है तो पश्चिम बंगाल की जनता अपने जनादेश के जरिये ऐसा करेगी।’’

सरकार ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ‘‘भाजपा के अग्रिम संगठन की तरह काम कर रहा है’’ और उसने ‘‘एक राजनीतिक दल को खत्म करने’’ की कोशिश शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह संसदीय लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।’’

सरकार ने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस का राजनीतिक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं की हत्या, पार्टी कार्यालयों पर कब्जे और ‘‘घोर कुशासन’’ के लिए तृणमूल कांग्रेस जिम्मेदार रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि निर्वाचन आयोग भाजपा के इशारे पर किसी राजनीतिक दल को खत्म करने की इस प्रकार की कवायद शुरू कर दे। आयोग का इस तरह का पक्षपातपूर्ण रवैया लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर कर रहा है।’’

सरकार ने कहा, ‘‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इस फैसले का कड़ा विरोध करती है।’’

इस बीच, निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट को उपचुनाव के लिए ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया।

आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के अरूप रॉय गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया।

निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के दौरान पार्टी के नाम और ‘पुष्प एवं तृण’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल न करने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया था।

भाषा सिम्मी नरेश

नरेश


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