आज अदालत में उन्हें हराया, चुनाव में भी करारी शिकस्त देंगे: एसआईआर आदेश पर अभिषेक बनर्जी
आज अदालत में उन्हें हराया, चुनाव में भी करारी शिकस्त देंगे: एसआईआर आदेश पर अभिषेक बनर्जी
(फाइल फोटो के साथ)
बारासात, 19 जनवरी (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने उच्चतम न्यायाल द्वारा निर्वाचन आयोग को गणना फॉर्म के संबंध में सोमवार को दिए गए ताजा निर्देश को “उनके मुंह पर दो करारे तमाचे” करार दिया, “जिन्होंने लोगों को मतदान के उनके मौलिक अधिकार से वंचित करने की कोशिश की।”
न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को तार्किक विसंगतियों के कारण सुनवाई के लिए बुलाए गए मतदाताओं के नाम प्रकाशित करने का निर्देश दिया है।
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए अभिषेक ने कहा कि “अदालत में मिली इस जीत” के बाद पार्टी को अप्रैल में होने वाले “विधानसभा चुनावों में भी जीत” हासिल होगी।
अभिषेक ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर इशारा करते हुए कहा, “यह ‘मां माटी मानुष’ की जीत है। यह पश्चिम बंगाल की जनता की उन लोगों पर जीत है, जिन्होंने मतदाता सूची से एक करोड़ नागरिकों के नाम मिटाने की कोशिश की।”
उन्होंने कहा, “शीर्ष अदालत ने उनके मुंह पर दो करारे तमाचे जड़े हैं, जिन्होंने न केवल पश्चिम बंगाल की जनता को भूखा मारने की कोशिश की, बल्कि उन्हें मतदान के मौलिक अधिकार से वंचित करने का भी प्रयास किया।”
अभिषेक ने कहा, “आज हमने उन्हें अदालत में हराया। हम अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी उन्हें करारी शिकस्त देंगे। तैयार रहें, पश्चिम बंगाल उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश या गुजरात नहीं है। इस राज्य ने राष्ट्र के स्वतंत्रता संग्राम और पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त किया। हम बाहरी लोगों के सामने सिर नहीं झुकाते।”
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में ग्राम पंचायत और ब्लॉक कार्यालयों तथा शहरी क्षेत्रों में वॉर्ड कार्यालयों में अगले तीन दिन के भीतर “तार्किक विसंगतियों” की सूची में शामिल लोगों के नाम प्रदर्शित करे और सूची के प्रकाशन के 10 दिनों के भीतर उन्हें सुनवाई के लिए बुलाए।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास में मनमानी और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के आरोप लगाने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान नोटिस प्राप्तकर्ताओं को सुनवाई के दौरान किसी वकील, परिवार के सदस्य, पड़ोसी या यहां तक कि राजनीतिक दल के बीएलए (बूथ स्तरीय एजेंट) की सहायता लेने की अनुमति दे दी, लेकिन केवल उचित अनुमति के साथ।
शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग को यह भी निर्देश दिया कि सुनवाई के दौरान माध्यमिक परीक्षा के प्रवेश पत्र को वैध एसआईआर दस्तावेज के रूप में माना जाए, जिस पर जन्मतिथि दर्ज होती है।
अभिषेक ने कहा, “भाजपा का एसआईआर खेल खत्म हो गया है।”
तृणमूल नेता ने कहा कि उनके पास जानकारी है कि शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग को सुनवाई के लिए उपस्थित मतदाताओं की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों की रसीद उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा, “तो मोदी जी, अब हमें बताइए कि कौन ज्यादा ताकतवर है? पश्चिम बंगाल के 10 करोड़ लोग या भाजपा के जमींदार? बाहर से आए उत्पीड़क या मेहनतकश जनता?”
भाषा पारुल माधव
माधव


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