दिल्ली की अदालत ने दो कुख्यात अपराधियों को मकोका के तहत दोषी करार दिया, आजीवन कारावास
दिल्ली की अदालत ने दो कुख्यात अपराधियों को मकोका के तहत दोषी करार दिया, आजीवन कारावास
नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) दिल्ली की अदालत ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के कड़े प्रावधानों के तहत दो कुख्यात अपराधियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि दोषी करार दिये गए अपराधियों की पहचान विकास गुलिया उर्फ विकास लगारपुरिया और धीरपाल उर्फ काना के रूप में हुई है।
पुलिस ने बताया कि गुलिया कम से कम 18 आपराधिक मामलों में संलिप्त था जबकि धीरपाल हत्या, हत्या के प्रयास, जबरन वसूली, कारागार अधिनियम का उल्लंघन, लोक सेवकों के आदेशों की अवज्ञा, आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन और गंभीर चोट पहुंचाने सहित 10 गंभीर अपराधों में संलिप्त था।
पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों को नजफगढ़ पुलिस थाना में मकोका की धारा तीन के तहत दर्ज प्राथमिकी में सजा सुनाई गई है। उसने बताया कि मामला दर्ज होने के बाद द्वारका जिले की पुलिस ने विस्तृत जांच की।
पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान, जांचकर्ताओं ने विभिन्न अदालतों से दोनों आरोपियों के खिलाफ कई पिछले मामलों की प्रमाणित प्रतियां एकत्र कीं, जिससे लगातार और संगठित आपराधिक गतिविधि का एक पैटर्न स्थापित हुआ।
पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान खुलासा हुआ कि दोनों आरोपी पूर्व के कई मामलों में जमानत मिलने के बावजूद गंभीर अपराधों में संलिप्त रहे, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ।
द्वारका के पुलिस उपायुक्त अंकित सिंह ने एक बयान में कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष ने कुल 86 गवाहों में से 59 से पूछताछ की और आरोपियों की लगातार गैरकानूनी गतिविधियों को साबित करने के लिए व्यापक दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने पाया कि आरोपियों ने कानून के प्रति कोई भय या सम्मान नहीं दिखाया, जो संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए मकोका जैसे विशेष कानूनों को लागू करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।’’
उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वंदना जैन की अदालत ने पिछले साल 10 दिसंबर को दोनों आरोपियों को मकोका की धारा 3 के तहत दोषी करार दिया।
बयान के मुताबिक अदालत ने गुलिया और धीरपाल दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और उन पर ती-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषियों को एक साल की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
भाषा धीरज रंजन
रंजन
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