दिल्ली: अदालत ने यौन उत्पीड़न, धमकी और अश्लील वीडियो बनाने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज की

दिल्ली: अदालत ने यौन उत्पीड़न, धमकी और अश्लील वीडियो बनाने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज की

दिल्ली: अदालत ने यौन उत्पीड़न, धमकी और अश्लील वीडियो बनाने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज की
Modified Date: April 13, 2026 / 11:13 pm IST
Published Date: April 13, 2026 11:13 pm IST

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने अपनी पूर्व साथी के साथ बार-बार मारपीट, यौन शोषण करने तथा उसे डराने-धमकाने के आरोपी व्यक्ति को जमानत देने से सोमवार को इनकार कर दिया।

अदालत ने कहा कि आरोपों की गंभीरता, पुख्ता सबूतों, गवाहों को प्रभावित करने के जोखिम और लंबित फॉरेंसिक रिपोर्ट को देखते हुए आरोपी को हिरासत में रखना आवश्यक है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी आरोपी सक्षम कौशिक की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत बलात्कार, जानबूझकर चोट पहुंचाने, अपहरण और आपराधिक धमकी के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता की आरोपी से जनवरी में मुलाकात हुई थी, जब उसने कॉलेज में पीछा करते हुए उसके प्रति रुचि दिखाई थी। फरवरी में आरोपी का व्यवहार और अधिक आक्रामक हो गया और उसने महिला की निजता का हनन करना शुरू कर दिया। आरोपी हर जगह उसके साथ जाने लगा और उसे जबरन एक अपार्टमेंट दिलाकर उसकी मर्जी के बिना वहां रहने लगा। साथ ही उसने महिला को धमकाया कि अगर उसने शिकायत की तो वह उसके वीडियो सार्वजनिक कर देगा।

आरोप है कि 14 मार्च को आरोपी ने पीड़िता के साथ मारपीट की, उसे जबरन शराब पिलाई, उसका फोन और लैपटॉप तोड़ दिया और अपमानजनक यौन कृत्य करने के लिए मजबूर किया, जिसका उसने वीडियो भी बनाया।

न्यायाधीश ने कहा कि आरोपों की गंभीरता, मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज पीड़िता के बयानों और इस तथ्य को देखते हुए कि फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) से डिजिटल नतीजों का अभी इंतजार है, यह अदालत इस चरण में आरोपी को जमानत देने की इच्छुक नहीं है।

बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया कि यह मामला ‘आपसी सहमति से बने संबंधों के बिगड़ने और बदले की भावना से दर्ज कराई गई झूठी प्राथमिकी’ का है। उन्होंने व्हाट्सऐप चैट और होटल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए इसे सहमति से बना रिश्ता बताया।

वहीं, अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि बचाव पक्ष केवल अपनी पसंद के चैट दिखा रहा है और कई अहम ‘वॉयस नोट्स’ और तस्वीरों को छिपा रहा है।

उन्होंने आशंका जताई कि बाहर आने पर आरोपी, पीड़िता को डरा-धमका सकता है।

अदालत ने बचाव पक्ष की इन दलीलों को खारिज कर दिया कि सहमति से संबंध होने के कारण बलात्कार के आरोप झूठे हैं।

अदालत ने कहा कि आरोपी ने न केवल पीड़िता की सहमति के बिना शारीरिक संबंध बनाए, बल्कि अश्लील कृत्य रिकॉर्ड कर ‘वॉययूरिज्म’ (ताक-झांक) का अपराध भी किया।

भाषा सुमित सुरेश

सुरेश


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