नयी दिल्ली, 30 अगस्त (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 2021 में राम मनोहर लोहिया अस्पताल के नजदीक राहगीरों को टक्कर मारकर मौके से फरार होने के दोषी वाहन चालक की दो महीने कारावास की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि सड़क ‘एक साझा विरासत’ है और राहगीरों को भी इसे पार कर दूसरी ओर जीवित पहुंचने का अधिकार है। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललेर ने दिलीप कुमार की अपील पर यह फैसला सुनाया। कुमार को इस साल फरवरी में मजिस्ट्रेट की अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304 ए (लापरवाही से मौत का कारण बनना) का दोषी करार देते हुए दो महीने के कारावास की सजा सुनाई थी।
मजिस्ट्रेट अदालत ने उसे लापरवाही से वाहन चलाने (आईपीसी की धारा 279) के लिए 15 दिन कारावास की सजा सुनाई थी।
सत्र न्यायालय ने 17 अगस्त को दिए गए अपने फैसले में कहा, ‘‘सड़क एक साझा विरासत है। आधी रात को अस्पताल के गेट के बाहर सड़क पर कदम रखने वाले पैदल यात्री के पास कोई सुरक्षा कवच नहीं होता, सिवाय इस उम्मीद के कि गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति समझदारी से गाड़ी चलाएगा और जब यह उम्मीद टूटती है, तो कानून की मदद बदले की भावना से नहीं, बल्कि एक आम इंसानी अधिकार को सही ठहराने के लिए ली जाती है। राहगीरों को भी सड़क पार करके सुरक्षित दूसरी तरफ पहुंचने का अधिकार।’’
न्यायाधीश ललेर ने अपील खारिज करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा सुनाई गई सजा पहले ही कम है तथा इसमें और नरमी बरतने की जरूरत नहीं है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 27 जुलाई 2021 की आधी रात कुमार ‘तेज रफ्तार’ से कार चला रहा था और उसने राम मनोहर लोहिया अस्पताल के गेट संख्या-4 के सामने से सड़क पार कर रहे दो लोगों मीना भंडारी और राजन को टक्कर मार दी।
कुमार पीड़ितों को कोई चिकित्सा सहायता मुहैया कराए बिना मौके से फरार हो गया था।
भाषा धीरज दिलीप
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