दिल्ली पीजी हादसे के बाद पास की इमारत गिराने के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई से अदालत का इनकार
दिल्ली पीजी हादसे के बाद पास की इमारत गिराने के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई से अदालत का इनकार
नयी दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सत्य निकेतन में पिछले सप्ताह ढहे छात्रावास से सटी इमारत को गिराने के दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के फैसले पर चिंता जताने वाली याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से सोमवार को इनकार कर दिया।
एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ से कहा कि अधिकारियों ने छात्रावास के भूमिगत तल से मलबा हटाए बिना ही पास की इमारत को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी और मलबे में अब भी कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है। वकील ने मामले पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।
अदालत ने कहा कि पास की इमारत को गिराने का फैसला करने से पहले अधिकारियों ने कोई तकनीकी आकलन अवश्य किया होगा और उसने वकील से बिना किसी ठोस आधार के याचिका दायर नहीं करने को कहा।
पीठ ने वकील से कहा, ‘‘आपको यह जानकारी कहां से मिली कि मलबे के नीचे लोग फंसे हैं? आपको कैसे पता? उन्होंने पास की इमारत को गिराने का फैसला करने से पहले किसी तरह का तकनीकी आकलन जरूर किया होगा। यह केवल आपका अनुमान है कि वहां कुछ लोग हो सकते हैं। ऐसी दलील देने के लिए आपके पास कुछ आधार होना चाहिए।’’
पीठ ने कहा कि याचिका उसकी बारी आने पर सूचीबद्ध की जाएगी। उसने कहा, ‘‘इसमें इतनी जल्दी क्या है? आपको बिना किसी ठोस आधार के याचिका दायर नहीं करनी चाहिए। आपके पास कौन-सी तकनीकी जानकारी है?’’
दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘साउथ कैंपस’ के पास सत्य निकेतन में स्थित यह इमारत छह सितंबर को मरम्मत कार्य के दौरान ढह गई थी। इसमें लड़कों के लिए ‘पेइंग गेस्ट’ (पीजी) आवास की सुविधा थी।
उच्च न्यायालय ने सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना की एमसीडी से उच्चस्तरीय जांच कराने का सात सितंबर को आदेश दिया था। इस घटना में सात लोगों की मौत हो गई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
अदालत ने कहा था कि यह घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय या सरकार द्वारा संचालित छात्रावासों समेत अपर्याप्त आवास सुविधाओं, विद्यार्थियों की सुरक्षा तथा इस तरह की पीजी सुविधाओं को विनियमित करने के लिए एमसीडी और अन्य प्राधिकारियों द्वारा किए गए अपर्याप्त उपायों को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।
नगर निकाय ने ढहे छात्रावास से सटी इमारत को खतरनाक करार देने के बाद उसे नियंत्रित तरीके से गिराने की कार्रवाई आठ सितंबर को शुरू की थी।
उस इमारत में लड़कियों के लिए पीजी आवास की सुविधा थी और पास की पांच मंजिला इमारत ढहने के बाद उसे खाली करा लिया गया था।
भाषा
सिम्मी मनीषा
मनीषा

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