उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर पर यूजीसी से जुड़े प्रदर्शन की इजाजत न देने पर दिल्ली पुलिस से सवाल किया

उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर पर यूजीसी से जुड़े प्रदर्शन की इजाजत न देने पर दिल्ली पुलिस से सवाल किया

उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर पर यूजीसी से जुड़े प्रदर्शन की इजाजत न देने पर दिल्ली पुलिस से सवाल किया
Modified Date: September 17, 2026 / 06:35 pm IST
Published Date: September 17, 2026 6:35 pm IST

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजधानी की पुलिस से 2026 के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नियमन के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए क्षत्रिय करणी सेना को अनुमति न देने के फैसले को लेकर सवाल किया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए किसी दूसरी जगह की इजाजत देने के बारे में उसका रुख जानना चाहा।

क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष राज शेखावत की याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के संबंध में दी गई अपनी पूर्व की मंजूरी निरस्त कर दी है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मैं सरकार से पूछ रही हूं कि पूरी तरह से रोक कैसे लगाई जा सकती है? अगर आप कोई पाबंदी लगाना चाहते हैं, जिसमें प्रदर्शन स्थल भी शामिल है, तो कृपया मुझे बताएं।’’

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति नहीं दी जा रही है, क्योंकि यह जगह एक ‘‘संवेदनशील इलाके’’ में स्थित है।

उन्होंने अदालत को बताया कि मामले में निर्णय लेते समय अधिकारियों ने जगह के अलावा ‘‘सोशल मीडिया पर प्रसार और ‘लाइक’ तथा लोगों की भागीदारी’’ जैसी बातों पर भी गौर किया।

सरकारी वकील ने न्यायाधीश को भरोसा दिलाया कि अधिकारी उच्चतम न्यायालय के आदेशों और दिशा-निर्देशों के मुताबिक काम कर रहे हैं।

हालांकि, न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता की अर्जी पर फैसला करने के लिए पुलिस को निर्देश देते समय अदालत ने पहले ही ‘‘साफ तौर पर’’ कहा था कि अर्जी मंजूर करने के लिए कुछ शर्तें लगाई जा सकती हैं, क्योंकि विरोध-प्रदर्शन सिर्फ कुछ घंटों के लिए ही होना था और प्रदर्शनकारियों की कहीं और जाने की कोई योजना नहीं थी।

अदालत ने कहा, ‘‘क्या इस तरह का आदेश दिया जा सकता है? सिर्फ इसलिए कि आपको आशंका है कि कुछ लोग आ सकते हैं? आप उन्हें कैसे रोक सकते हैं? अगर आप नहीं चाहते कि वे जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन करें, तो कोई दूसरी जगह सुझाएं।’’

न्यायमूर्ति शर्मा ने सरकारी वकील से कहा कि वह विरोध-प्रदर्शन के लिए कोई वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने के बारे में निर्देश के साथ वापस आएं।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की।

भाषा सुभाष पारुल

पारुल


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