उच्च न्यायालय ने दिल्ली विधिज्ञ परिषद चुनाव के लिए पुनर्मतदान का आदेश देने से इनकार किया

उच्च न्यायालय ने दिल्ली विधिज्ञ परिषद चुनाव के लिए पुनर्मतदान का आदेश देने से इनकार किया

उच्च न्यायालय ने दिल्ली विधिज्ञ परिषद चुनाव के लिए पुनर्मतदान का आदेश देने से इनकार किया
Modified Date: June 6, 2026 / 08:40 pm IST
Published Date: June 6, 2026 8:40 pm IST

नयी दिल्ली, छह जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विधिज्ञ परिषद (बीसीडी) के चुनाव के लिए पुनर्मतदान का आदेश देने से शनिवार को इनकार करते हुए कहा कि मतपत्रों में कथित हेरफेर से पूरी निर्वाचन प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।

कई वकीलों ने याचिकाएं दायर कर इस आधार पर पुनर्मतदान कराए जाने का अनुरोध किया था कि 15 अप्रैल को एक मतगणना कर्मी द्वारा मतपत्रों से छेड़छाड़ की बात स्वीकार किए जाने की घटना से पूरा चुनाव अमान्य हो गया है।

न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने मतगणना फिर से करने का आदेश देते हुए कहा कि नए सिरे से मतदान की जरूरत नहीं है क्योंकि जिन मतपत्रों से छेड़छाड़ की गई, उनकी पहचान मतगणना प्रक्रिया के दौरान कर ली गई थी और अब उनसे बीसीडी के नियमों तथा भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के दिशानिर्देशों के अनुसार निपटा जाना चाहिए।

अदालत ने कहा कि जिन मतपत्रों पर ‘‘मिटाने, ऊपर से लिखने, संशोधन करने, जोड़ने या अन्य संदिग्ध बदलाव’’ दिखाई दें, उन्हें अलग किया जाए, सीलबंद बंडल या पैकेट में रखा जाए और उन पर ‘संदिग्ध मतपत्र’ अंकित किया जाए। उसने कहा कि इन मतपत्रों को चुनाव कराने के लिए गठित विशेष समिति में शामिल अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के समक्ष रखा जाएगा जो यह तय करेंगे कि इनकी गिनती कैसे की जाए और वह इसके लिए संक्षिप्त कारण दर्ज करेंगे।

अदालत ने कहा, ‘‘इससे पुनर्मतदान की जरूरत भी खत्म हो जाती है और बीसीडी चुनाव नए सिरे से कराए जाने के भारी खर्च से भी बचा जा सकेगा क्योंकि कथित हेरफेर निर्वाचन प्रक्रिया की जड़ तक नहीं जाता। ऐसी स्थिति से निपटने का तरीका बीसीडी नियमों और बीसीआई दिशानिर्देशों में पहले से दिया गया है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए हम बीसीडी चुनाव के लिए पुनर्मतदान का निर्देश देना उचित नहीं मानते क्योंकि मतपत्रों में हेरफेर की घटना से पूरी निर्वाचन प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।’’

बीसीडी चुनाव 21 से 23 फरवरी तक उच्च न्यायालय परिसर में हुए थे। इसमें प्राथमिकता आधारित मतदान प्रणाली के तहत 23 पदों के लिए 221 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था लेकिन 15 अप्रैल को एक मतगणना कर्मी कुछ मतपत्रों पर मतदाताओं की प्राथमिकता में कथित तौर पर बदलाव करते पाया गया जिसके कारण मतगणना रोक दी गई और प्राथमिकी दर्ज की गई।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं की यह दलील खारिज कर दी कि पहली प्राथमिकता वाले मतों की गिनती भी प्रभावित हुई थी। अदालत ने कहा कि हालांकि मतपत्रों में हेरफेर का पता चला था लेकिन इससे पहली प्राथमिकता वाले मतों की गिनती प्रभावित नहीं हुई क्योंकि निर्वाचन अधिकारी और चुनाव समिति ने 15 अप्रैल को ही तत्काल और उचित कार्रवाई की थी।

भाषा

सिम्मी माधव

माधव


लेखक के बारे में