दिल्ली उच्च न्यायालय ने आरोपी को बरी करने के आदेश को बरकरार रखा
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आरोपी को बरी करने के आदेश को बरकरार रखा
नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने लूटपाट के एक मामले में आरोपी को बरी करने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा और कहा कि वह फैसले में केवल तभी हस्तक्षेप कर सकता है, जब निष्कर्ष तथ्यों के विपरीत हों।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने आरोपी को बरी करने के निचली अदालत के नवंबर 2014 के आदेश के खिलाफ अभियोजन पक्ष द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए ‘‘निर्दोष होने की दोहरी धारणा’’ के सिद्धांत को रेखांकित किया और कहा कि निचली अदालत का आदेश ठोस और तर्कपूर्ण था।
अदालत ने 17 दिसंबर के आदेश में कहा, ‘‘यह स्थापित कानून है कि बरी किए जाने के खिलाफ अपील में अपीलीय अदालत को तब तक हस्तक्षेप करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, जब तक कि निचली अदालत के निष्कर्ष तथ्यों के विपरीत न पाए जाएं।’’
अदालत ने कहा, ‘‘बरी किये जाने के बाद आरोपी के पक्ष में लागू होने वाला ‘निर्दोषता की दोहरी धारणा का सिद्धांत’ कानून में अच्छी तरह से स्थापित है।’’
न्यायाधीश ने कहा कि निर्दोषता की दोहरी धारणा का कानूनी सिद्धांत दो स्तरों पर कार्य करता है। उन्होंने कहा कि पहला, आपराधिक न्यायशास्त्र के मूलभूत सिद्धांत के तहत कि प्रत्येक व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाएगा, जब तक कि उसे अदालत में दोषी साबित ना कर दिया जाए और दूसरा, आरोपी के बरी हो जाने पर, निर्दोषता की धारणा और भी मजबूत हो जाती है।
निचली अदालत की इस टिप्पणी से सहमति जताते हुए कि दिल्ली पुलिस आरोपी के अपराध को उचित संदेह से परे साबित करने में असमर्थ रही। उच्च न्यायालय ने कहा कि बरी करने का आदेश ‘विश्वसनीय, तर्कपूर्ण और साक्ष्यों द्वारा समर्थित’ था।
भाषा अमित दिलीप
दिलीप

Facebook



