नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 15.2 लाख रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में कथित संलिप्तता को लेकर निलंबित दिल्ली पुलिस के एक उप-निरीक्षक को जमानत दे दी है।
अदालत ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और मुकदमे में समय लगने की संभावना है।
विशेष न्यायाधीश पुनीत पाहवा दिल्ली पुलिस के निलंबित अधिकारी अंकुर मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिन पर एक बैंक से 15.2 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।
अदालत ने अपने 10 अप्रैल को दिए गए एक आदेश में कहा, ‘इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि तीन सह-आरोपी पहले से ही जमानत पर हैं, एक सह-आरोपी रीतिका को गिरफ्तार भी नहीं किया गया था और वर्तमान आवेदक/आरोपी ही एकमात्र व्यक्ति है जो हिरासत में है। इसलिए आरोपी अंकुर मलिक को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया जाता है।’
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मलिक ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर जाली दस्तावेज बनाकर और अपने पद का दुरुपयोग करके एक बैंक से 15.2 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। इस मामले में जाली आवेदनों के माध्यम से अदालती प्रक्रियाओं में हेरफेर करने के आरोप भी शामिल हैं।
जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी ने अपराध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और वित्तीय लेनदेन और डिजिटल संचार सहित दस्तावेजी साक्ष्य उसके अपराध में संलिप्त होने की पुष्टि करते हैं।
अभियोजन पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि उसे रिहा करने से साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है।
हालांकि, अदालत ने गौर किया कि फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट कब तक आएगी, यह स्पष्ट नहीं है और तब तक आरोप तय करने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि तीन सह-आरोपी पहले ही जमानत पर हैं, जबकि एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है और मलिक ही एकमात्र व्यक्ति हिरासत में है।
न्यायाधीश ने कहा, ‘वर्तमान आवेदक/आरोपी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और इस मामले में साक्ष्य अधिकतर दस्तावेजी प्रकृति के हैं।’
अदालत ने कहा, ‘यह सर्वविदित है कि जमानत पर रिहा आरोपी हिरासत में मौजूद आरोपी की तुलना में अपने मामले का बचाव करने की बेहतर स्थिति में होता है। वैसे भी, जब तक यह स्पष्ट न हो कि मुकदमा कब शुरू होगा, आरोपी को अनिश्चित काल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।’
इसके बाद अदालत ने दो जमानती के साथ 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर कर दी।
भाषा
राखी नरेश
नरेश