दिल्ली दंगा मामले के आरोपी खालिद सैफी को छह दिन की अंतरिम जमानत

दिल्ली दंगा मामले के आरोपी खालिद सैफी को छह दिन की अंतरिम जमानत

दिल्ली दंगा मामले के आरोपी खालिद सैफी को छह दिन की अंतरिम जमानत
Modified Date: April 9, 2026 / 08:40 pm IST
Published Date: April 9, 2026 8:40 pm IST

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों से जुड़े मामले के आरोपी खालिद सैफी को पारिवारिक समारोहों में शामिल होने के लिए बृहस्पतिवार को छह दिनों की अंतरिम जमानत दे दी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी की अदालत ने ‘यूनाइटेड अगेन्स्ट हेट’ के संस्थापक सैफी की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया, जिसमें उसने अपने भतीजे और भतीजी के निकाह में शामिल होने के लिए दो हफ्ते की अंतरिम जमानत देने का अनुरोध किया था।

अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता के भतीजे की बारात 16 अप्रैल 2026 को निकलेगी और उसी दिन उसका निकाह होगा, जबकि उसकी भतीजी का निकाह तथा भतीजी और भतीजे दोनों का प्रीति भोज समारोह 19 अप्रैल 2026 को निर्धारित है। चूंकि, ये समारोह महत्वपूर्ण हैं, इसलिए अदालत याचिकाकर्ता को केवल इन समारोहों में शामिल होने के लिए वांछित राहत प्रदान कर सकती है।”

विशेष लोक अभियोजक अनिरुद्ध मिश्रा ने सैफी की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी बार-बार एक ही आधार पर राहत का अनुरोध कर अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है।

उन्होंने दलील दी, “याचिकाकर्ता को इससे पहले दो बार 13 अक्टूबर 2025 और फिर 29 जनवरी 2026 को परिवार में विवाह समारोहों के लिए अंतरिम जमानत प्रदान की गई थी तथा उसे बार-बार यह छूट लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर गौर करने के बाद कहा कि याचिका में उल्लिखित कुछ कार्यक्रमों-जैसे कि हल्दी, भात और छल्ला में सैफी की मौजूदगी जरूरी नहीं थी।

हालांकि, उसने माना कि 16 और 19 अप्रैल को निर्धारित निकाह समारोह और प्रीति भोज महत्वपूर्ण पारिवारिक कार्यक्रम थे, जिनके लिए सीमित राहत की आवश्यकता थी।

अदालत ने सैफी को 20,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि का एक जमानती पेश करने की शर्त पर अंतरिम जमानत दे दी।

उसने सैफी को अंतरिम जमानत अवधि में दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से बाहर न जाने, अपना मोबाइल फोन हमेशा चालू रखने और अभियोजन पक्ष के गवाहों तथा मीडिया से संपर्क नहीं करने का निर्देश दिया।

नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा बेकाबू हो जाने के बाद 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुईं, जिसमें कम से कम 53 लोग मारे गए और लगभग 700 लोग घायल हो गए।

भाषा पारुल अविनाश

अविनाश

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