दिल्ली दंगे: कालिता को दस्तावेज देखने की अनुमति को चुनौती देने संबंधी याचिका पर फैसला सुरक्षित

दिल्ली दंगे: कालिता को दस्तावेज देखने की अनुमति को चुनौती देने संबंधी याचिका पर फैसला सुरक्षित

दिल्ली दंगे: कालिता को दस्तावेज देखने की अनुमति को चुनौती देने संबंधी याचिका पर फैसला सुरक्षित
Modified Date: September 1, 2026 / 08:22 pm IST
Published Date: September 1, 2026 8:22 pm IST

नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें आरोपी देवांगना कालिता को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़े षडयंत्र मामले में उन दस्तावेजों का अवलोकन करने की अनुमति देने वाले आदेश को चुनौती दी गई थी जिनका इस्तेमाल अभियोजन पक्ष ने नहीं किया था।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू और कालिता का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलें सुनीं।

इसके बाद, पीठ ने दिल्ली पुलिस की उस याचिका पर कालिता को नोटिस जारी किया, जिसमें उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी।

राजू ने पूर्व में दलील दी थी कि आरोप तय होने तक कालिता किसी भी दस्तावेज की हकदार नहीं है।

कालिता के वकील ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि जिन दस्तावेजों पर भरोसा नहीं किया गया है, उनकी सूची भी आरोप तय करने से पहले दी जानी चाहिए।

उच्च न्यायालय ने 5 जून को, 2020 के दंगों से जुड़े कथित बड़े षडयंत्र के मामले में आरोप तय करने पर लगी अपनी पिछली रोक हटा दी थी और अधीनस्थ अदालत को अंतिम आदेश पारित करने की अनुमति दे दी थी।

उच्च न्यायालय ने कालिता की उस याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश वापस ले लिया, जिसमें उसने पुलिस को मामले से जुड़े कुछ वीडियो और व्हाट्सएप चैट उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

हालांकि, अदालत ने कालिता की एक अलग याचिका को मंजूरी दे दी और उसे गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) मामले में उन दस्तावेजों का अवलोकन करने की इजाजत दे दी जिनका इस्तेमाल अभियोजन पक्ष ने नहीं किया था।

कालिता ने पहले उच्च न्यायालय में अर्जी देकर दावा किया था कि दिल्ली पुलिस ने कुछ लोगों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ फरवरी 2020 में हुए विरोध प्रदर्शनों की रिकॉर्डिंग करने का काम सौंपा था। उसने मांग की कि मामले की सुनवाई कर रही अदालत में बहस शुरू होने से पहले उन्हें यह फुटेज दिया जाए, क्योंकि इससे साबित होगा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रही थी।

वीडियो फुटेज के अलावा, उसने एक ग्रुप की ‘‘पूरी व्हाट्सऐप चैट’’ भी मांगी थी और आरोप लगाया था कि उसके खिलाफ ‘‘इसके चुनिंदा अंशों’’ का इस्तेमाल किया जा रहा।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के संबंध में कई प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इन दंगों में फरवरी 2020 में 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

भाषा

सुभाष माधव

माधव


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