विजय से मुलाकात के बाद भावुक हुई बुजुर्ग महिला
विजय से मुलाकात के बाद भावुक हुई बुजुर्ग महिला
सलेम, एक सितंबर (भाषा) तमिलनाडु के सलेम जिले की बुजुर्ग महिला चेलम के लिए मंगलवार का दिन भी खेतों में काम करने वाले किसी अन्य दिन की तरह ही शुरू हुआ।
लेकिन दोपहर में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से हुई कुछ पल की मुलाकात ने उनके सामान्य दिन को ऐसी याद में बदल दिया, जिसे वह जीवन भर संजोकर रखना चाहती हैं। चेलम इस मुलाकात की खुशी की तुलना ‘‘एक करोड़ रुपये जीतने’’ से करती हैं।
मेट्टूर जलविद्युत बिजलीघर के आधिकारिक निरीक्षण और सिंचाई के लिए स्टेनली जलाशय के फाटक खोले जाने के बाद विजय ने रास्ते में सड़क किनारे एक खेत पर अचानक रुकने का फैसला किया।
सलेम हवाई अड्डा की ओर जाते समय उन्होंने पास के खेतों में काम कर रही बुजुर्ग महिलाओं के एक समूह को देखा। इसके बाद मुख्यमंत्री अपनी गाड़ी से उतरे और उनसे मिलने पहुंच गये।
मुख्यमंत्री का काफिला जैसे ही वहां पहुंचा, आसपास लोगों की भीड़ जुटने लगी। यह देखने के लिए कि आखिर क्या हो रहा है, चेलम भी वहां पहुंच गईं। मुख्यमंत्री को देखते ही वह बिना किसी झिझक के आगे बढ़ीं और उनका हाथ पकड़ लिया।
भावुक चेलम ने उस पल को याद करते हुए कहा, ‘‘उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैंने खाना खा लिया है?’’
उन्होंने बताया, ‘‘मैंने उनसे कहा कि नहीं खाया है, क्योंकि मैं पहले आपसे मिलना चाहती थी और आपका इंतजार कर रही थी।’’
मुख्यमंत्री ने चेलम का हाथ पकड़कर उनका नाम पूछा और उनका हाल-चाल जाना। विजय ने चश्मा उतारा और एक किसान के घर और पशुओं के बाड़े का मुआयना किया।
इसके बाद विजय ने प्यार से चेलम को चश्मा पहनाया – यह पुराने हीरो का एक फ़िल्मी अंदाज़ था। विजय ने अभिनय छोड़कर राजनीति में कदम रखा है।
चेलम ने कहा, ‘‘वह बिल्कुल वैसे ही लग रहे थे जैसे अपनी फ़िल्मों में दिखते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इतनी खुश थी कि मैंने उनसे कहा कि अगर कभी किसी ने उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो मैं उनका बचाव करूंगी।’’
पंद्रह मिनट की इस मुलाक़ात के दौरान, सत्ताधारी पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ के अध्यक्ष विजय ने मेजबान परिवार को पारंपरिक तोहफ़े – धोती और साड़ी – दिए और खेती-बाड़ी से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर बातचीत की। इसमें दूध की खरीद की कीमत बढ़ाकर 44 रुपये करने के सरकार के हालिया फ़ैसले पर भी चर्चा हुई।
चेलम के लिए, उस पल का जादू इतना ज़बरदस्त था कि वह हैरान रह गईं। उनका हाथ पकड़ने और उन्हें अपना घर-बार दिखाने के उत्साह में, वह अपनी रोज़मर्रा की मुश्किलों के बारे में बताना भूल गईं — जैसे राशन कार्ड खो जाना, बुढ़ापे की वजह से भारी शारीरिक मेहनत न कर पाना और खाने-पीने का सामान खरीदने के लिए एक मामूली मासिक भत्ते पर निर्भर रहना।
भाषा राजकुमार अविनाश
अविनाश

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