परिसीमन : स्टालिन ने द्रमुक सांसदों की आपात बैठक बुलाई
परिसीमन : स्टालिन ने द्रमुक सांसदों की आपात बैठक बुलाई
(फाइल फोटो के साथ)
चेन्नई, 15 अप्रैल (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के कारण राज्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा करने के लिए बुधवार को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सांसदों की एक आपात बैठक बुलाई है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, स्टालिन अपने व्यस्त चुनावी कार्यक्रम के बीच धर्मपुरी से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आपात बैठक करेंगे।
सूत्रों ने बताया कि बैठक पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होगी और परिसीमन को लेकर संसद में पार्टी के रुख पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने मंगलवार को चेतावनी दी थी कि अगर परिसीमन प्रक्रिया में राज्य के हित को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कदम उठाया गया या उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत में अनुचित वृद्धि की गई, तो तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर आंदोलन होंगे, ‘‘पूरी ताकत से विरोध प्रदर्शन’’ होंगे जिससे राज्य ठप पड़ सकता है।
स्टालिन ने कहा कि देश को एक बार फिर ‘‘1950 और 1960 के दशक की द्रमुक देखने को मिल सकती है।’’ उन्होंने स्पष्ट तौर पर पार्टी के शुरुआती दौर की ओर इशारा किया जिसमें पार्टी ने राज्य के अधिकारों और हिंदी को कथित रूप से थोपे जाने के खिलाफ कई आंदोलनों का नेतृत्व किया था।
द्रमुक की स्थापना 1949 में द्रविड़ विचारधारा के दिग्गज नेता सी एन अन्नादुराई ने की थी।
उत्तरी तमिलनाडु में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए स्टालिन ने 14 अप्रैल को आरोप लगाया था कि महिला आरक्षण पर मसौदा विधेयक से पता चलता है कि यह एक ‘‘षड्यंत्र’’ है जो परिसीमन लागू होने पर तमिलनाडु और उत्तरी राज्यों के बीच अंतर को बढ़ाएगा।
तेलंगाना के अपने समकक्ष रेवंत रेड्डी द्वारा परिसीमन पर पत्र लिखे जाने के बाद मंगलवार को स्टालिन ने उन्हें संदेश दिया कि, ‘‘हमारी एकता हमारे राज्य के अधिकारों की रक्षा करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक न्यायपूर्ण एवं समान भविष्य सुनिश्चित करने के लिए है। दक्षिण एकजुट होकर खड़ा रहेगा, एक स्वर में बोलेगा और संघवाद की सच्ची भावना को कायम रखेगा।’’
रेड्डी ने दक्षिणी राज्यों और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर एक ‘‘हाइब्रिड मॉडल’’ का प्रस्ताव रखा है जिसके तहत प्रस्तावित अतिरिक्त सीट में से 50 प्रतिशत सीट आनुपातिक आधार पर आवंटित की जाएंगी और शेष सीट जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) और अन्य मानदंडों के आधार पर आवंटित की जाएंगी।
भाषा सुरभि मनीषा
मनीषा

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