सहकारी संस्थाओं को और अधिक मजबूत करने की राज्यसभा में उठी मांग

सहकारी संस्थाओं को और अधिक मजबूत करने की राज्यसभा में उठी मांग

सहकारी संस्थाओं को और अधिक मजबूत करने की राज्यसभा में उठी मांग
Modified Date: August 12, 2026 / 04:07 pm IST
Published Date: August 12, 2026 4:07 pm IST

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने सहकारी संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में इन संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

सहकारिता क्षेत्र को नयी दिशा देने और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को बदलती जरूरतों के अनुरूप प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लाये गए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के रामराव सखाराम वडकुते ने कहा कि सहकारी संस्थाओं से किसानों को बहुत मदद मिलती है क्योंकि उन्हें बीज से लेकर बाजार तक बहुत कुछ चाहिए। ‘‘यह विधेयक सहकारी संस्थाओं को मजबूत करेगा और निश्चित रूप से किसानों को इससे बहुत मदद मिलेगी।’’

वडकुते ने मांग की कि सीमांत किसानों को सहकारी संस्थाओं का लाभ मिले, तथा सहकारिता में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए। ‘‘यह विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।’’

सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से उच्च सदन में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक 2026 को सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने पेश किया।

विधेयक पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए बीजू जनता दल की सुलता देव ने कहा ‘‘हर राज्य, जिले, गांव में सहकारी सोसायटी अलग-अलग होती हैं। सहकारी आंदोलन गांवों और राज्यों से शुरू हुआ था। लेकिन आज गांवों से लेकर राज्यों तक, पूरे अधिकार केंद्र को क्यों दिए जा रहे हैं?’’

सुलता ने कहा कि सरकार को कभी किसानों के मन की बात भी सुननी चाहिए। ‘‘किसान कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनकी बातें की जाती हैं लेकिन उनकी परेशानियां आज भी बरकरार हैं। उनको उर्वरक नहीं मिलता। बाढ़ फसल खराब कर देती है। वह कहां जाएंगे ?’’

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के गोल्लाबाबू राव ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि सहकारी बैंकों को मजबूत करने के लिए सरकार को राज्यों के साथ मिल कर काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को इसका पूरा लाभ मिल सके।

अन्नाद्रमुक सदस्य डॉ एम थंबीदुरै ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि राज्यों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

जद (यू) के संजय कुमार झा ने कहा कि 2021 में सहकारिता मंत्रालय बनाया गया और सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए काम शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की ही एक कड़ी है।

उन्होंने कहा कि बिहार में बंद हो चुकी चीनी मिलों को सहकारी क्षेत्र के दायरे में लाकर उन्हें फिर से खोलने से वहां के लोगों को रोजगार मिला है।

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक 2026 को क्रांतिकारी कदम बताते हुए झा ने कहा कि यह विधेयक किसानों को बाजार से जोड़ेगा, कृषि को उद्योग से जोड़ेगा और फार्म को फैक्टरी से जोड़ेगा।

विधेयक का समर्थन करते हुए तेदेपा के विजय चिंताकायला ने कहा कि तकनीक के इस दौर में सहकारिता क्षेत्र में भी बदलाव जरूरी है और यह विधेयक समय की इस जरूरत को पूरा करता है।

चिंताकायला ने कहा कि हाल में आंध्र प्रदेश में तोतापुरी आम उत्पादकों को परेशानी का सामना करना पड़ा लेकिन जल्द ही यह मुद्दा हल कर लिया गया।

शिवसेना की ज्योति नागनाथ वाघमारे ने कहा कि यह विधेयक समाज के वंचित वर्ग की परेशानियों को दूर करेगा। ‘‘आज देश में सरकार और सहकार दोनों पूरी मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं जिससे यह भरोसा मजबूत होता है कि विकसित भारत का हमारा सपना सच होगा।’’

भाजपा के अमरपाल मौर्य ने कहा कि सहकारिता भारत की सांस्कृतिक चेतना का आधार रही है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छह जुलाई 2021 को अलग सहकारिता मंत्रालय बना कर किसानों को मजबूत बनाने का एक और प्रयास किया।

उन्होंने कहा ‘‘आज किसान उत्पादन ही नहीं करना चाहता बल्कि प्रसंस्करण, भंडारण, ब्रांडिंग, डिजिटल बाजार, वित्तीय सहायता और अपनी उपज का बेहतर मूल्य चाहता है। 32 करोड़ सदस्यों वाले सहकारिता परिवार के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक 2026 बेहद उपयोगी होगा।’’

चर्चा में द्रमुक सदस्य केआरएन राजेश कुमार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राजेंद्र हीरालाल जैन, बीआरएस के रविचंद्र वद्दीराजू, भाजपा के सदानंद महालू शेट तानवड़े, बंशीलाल गुर्जर, डॉ अलका गुर्जर, अन्नाद्रमुक सदस्य डॉ एम धनपाल, यूपीपी (एल) के प्रमोद बोरो ने भी हिस्सा लिया।

भाषा मनीषा अविनाश

अविनाश


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