राज्यसभा में उठी न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने की मांग

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राज्यसभा में उठी न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने की मांग

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  • Publish Date - August 11, 2026 / 04:46 PM IST,
    Updated On - August 11, 2026 / 04:46 PM IST

नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों ने न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल) की कार्यप्रणाली, लंबित मामलों के निपटारे, न्यायिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े मुद्दे उठाए और न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने की मांग की।

दो बार के स्थगन के बाद उच्च सदन में दोपहर दो बजे ‘न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026’ पर चर्चा शुरू हुई। चर्चा की शुरूआत करते हुए भाजपा के सुभाष बराला ने कहा कि पिछले कुछ साल के दौरान न्यायाधिकरणों के समक्ष रिक्तियां, लंबित मामलों, अवसंरचना सहित कई चुनौतियां आई हैं। यह विधेयक विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति के लिए दक्षता बढ़ाना, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और योग्यता संबंधी मानदंडों में एकरूपता सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सुधार की 2014 में शुरूआत हुई थी, ‘न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026’ इन्हीं सुधारों की दिशा में एक कदम है।

बराला ने कहा कि न्याय में विलंब की वजह से लोगों को खासी परेशानी होती है। सवा पांच लाख मामलों का लंबित होना केवल लंबित होना ही नहीं है बल्कि इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी होता है। ‘‘यह विधेयक इस समस्या का भी समाधान करेगा।’’

इससे पहले विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026’ को चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया। उपसभापति हरिवंश ने विधेयक पर चर्चा शुरू करने के लिए कहा। इस दौरान कांग्रेस एवं कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्य अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर हंगामा कर रहे थे।

उपसभापति हरिवंश ने इसकी अनुमति नहीं दी जिसके बाद विरोध जताते हुए ये सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।

बीजद के सस्मित पात्रा ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि न्यायाधिकरण सुधार केवल न्यायाधिकरण सुधार ही नहीं है बल्कि यह प्रशासनिक सुधार भी है।

उन्होंने कहा कि ‘नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल’ को भी इस विधेयक में शामिल किया जाना चाहिए ।

द्रमुक के तिरुचि शिवा ने कहा कि आयोग के अध्यक्ष का मनोनयन भारत के प्रधान न्यायाधीश के परामर्श से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा ‘‘यह भी देखना चाहिए कि न्यायाधिकरण के आदेश का पालन किया जा रहा है या नहीं।’’

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के एस निरंजन रेड्डी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि प्रस्तावित आयोग में एक अध्यक्ष तथा चार सदस्य होंगे। इनमें दो न्यायिक और दो तकनीकी सदस्य होंगे। ‘‘इनका चयन सावधानी से और उत्कृष्टता के आधार पर किया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण में रिक्तियों को यथाशीघ्र भरा जाना चाहिए।

अन्नाद्रमुक सदस्य आई एस इन्बादुरै ने कहा कि नेशनल ट्रिब्यूनल डेटा ग्रिड कामकाज में पारदर्शिता लाने में मददगार होगा।

बीआरएस के रविचंद्र वद्दीराजू ने कहा कि आयोग को निष्पक्ष एवं स्वतंत्र हो कर काम करना चाहिए और समय-समय पर उसके काम की समीक्षा की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरणों की पीठ में पर्याप्त सुविधाएं होनी चाहिए।

भाजपा के सतीश पुनिया ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए एक विधेयक आवश्यक है। ‘‘समय पर न्याय मिले, न्यायिक व्यवस्था पारदर्शी हो और जनता का इस व्यवस्था पर विश्वास हो, इस सोच के मानक पर यह विधेयक सही साबित होता है।’’

पुनिया ने कहा कि 2018 में 37 न्यायाधिकरण काम कर रहे थे जो अलग-अलग मंत्रालय के थे और अकेले वित्त मंत्रालय के तहत 12 न्यायाधिकरण काम कर रहे थे। ‘‘मुझे लगता है कि इस पूरे तंत्र को मजबूत बनाने और व्यवस्थित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।’’

भाजपा की स्वाति मालीवाल ने कहा कि राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग को यह अधिकार दिया जाए कि वह समय-समय पर यह विश्लेषण करे कि किन न्यायाधिकरणों में क्षेत्रीय पीठों की जरूरत है।

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने मांग की कि सभी न्यायाधिकरणों में दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को आरक्षण दिया जाए।

चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के दौरान किसी भी आदिवासी, किसी भी दलित को उच्च न्यायपालिका में जगह नहीं मिली। उन्होंने कहा कि आज कॉलेजियम व्यवस्था है और उच्च न्यायपालिका के लिए नाम कॉलेजियम ही भेजती है।

रीजीजू ने कहा ‘‘मैं पहला आदिवासी मंत्री हूं और बाबा साहेब आंबेडकर के बाद पहला बौद्ध हूं जो कानून मंत्री बना है।’’

चर्चा में राकांपा के राजेंद्र हीरालाल जैन, तेदेपा के भाष्यम रामकृष्ण, भाजपा के सुजीत कुमार, महेश केवट, मयंक कुमार नायक, बसपा के रामजी ने भी हिस्सा लिया।

भाषा

मनीषा अविनाश

अविनाश